लीदिया निकोलायेव्ना गेओर्गीयेवा

कवि, निबंधकार, संस्कृतिविद् लीदिया ग्रिगोर्येवा का जन्म उक्राइना में हुआ। १९६९ में लीदिया ने कज़ान राजकीय विश्वविद्यालय के इतिहास और भाषा संकाय से एम.ए. की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे पत्रकार रहीं, स्कूल में अध्यापिका रहीं और रेडियो की राष्ट्रीय प्रसारण सेवा में साहित्यिक कार्यकमों की रचयिता और प्रस्तोता रहीं।

लीदिया निकालायेव्ना गियोर्येवा


लीदिया ग्रिगोर्येवा की पहली कविता-पुस्तिका थी- 'प्रीमेती व्येका' (शताब्दी के चिन्ह), जो १९७८ में प्रकाशित हुई। तब से अब तक इनके रूस में और विदेशों में दस कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं जिनमें काव्य-उपन्यासिका 'मिलने-जुलने वाले' (१९८८) के अलावा 'प्रेम का अकाल' (१९९२), रूसी, जापानी और अंग्रेज़ी भाषाओं में कविताओं का चयन (१९९५), 'पागल माली' (१९९९), 'बगीचे की देखभाल' (२००१) और 'लोग गरीब नहीं हैं (२००२) आदि उल्लेखनीय हैं।


लीदिया गिगोर्येवा का कविता संग्रह 'पवित्र संत' सन २००७ में बूनिन पुरस्कार के लिए शार्ट-लिस्ट में शामिल रहा। लीदिया ग्रिगोर्येवा ने 'लंदन में स्वेतायेवा', 'लंदन में गुमिल्योफ', 'लंदन में स्क्रयाबिन' 'वेरा पाव्लव्ना के सपने' 'लंदन गाँव' आदि डाक्यूमेंट्री फिल्मों की पटकथाएँ भी लिखी हैं।


लीदिया गिगोर्येवा एक चर्चित अनुवादिका भी हैं और इन्होंने अनेक सोवियत भाषाओं के कवियों की कविताओं का रूसी में अनुवाद किया है। वे अनेक अंतर्राष्ट्रीय लेखक सम्मेलनों और गोष्ठियों में तथा विश्व कविता सम्मेलनों में भाग ले चुकी हैं। इनकी कविताएँ जापानी, चीनी, अंग्रेज़ी, हंगारी, स्लोवाकियाई, चेक, फ्रांसिसी, जर्मन, अरबी और अन्य भाषाओं में अनूदित हो चुकी हैं। इन्होंने फोटो-कविता के नाम से कविता में एक नई परियोजना शुरू की है, जिसकी प्रस्तुति रूस में और अन्य देशों में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। लीदिया ग्रिगोर्येवा अंतर्राष्ट्रीय पेन क्लब की सदस्य हैं।