वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा स्थापित युग सुधार आंदोलन है। जैसा कि इसका ध्येय वाक्य है:- हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा, हम बदलेंगे, युग बदलेगा। इस विश्वास के आधार पर आचार्य श्रीराम शर्मा जी की मान्यता थी कि व्यक्ति के आत्म सुधार से ही युग सुधार हो सकेगा। आचार्य ने युग परिवर्तन के लिये सप्तसूत्रीय आंदोलन का सूत्रपात किया था। इसकी स्थापना वैदिक सनातन धर्म के सिद्धांतों के आधार पर १९५० के दशक में हुई थी। इस संस्था ने विचार क्रान्ति अभियान, प्रज्ञा अभियान आदि चलाये जिसका उद्देश्य जनमानस में वैचारिक परिवर्तन लाकर समाज का उत्थान करना है। हम बदलेंगे, युग बदलेगा; मनुष्य भटका हुआ देवता है आदि इनके प्रमुख उद्घोष है। इस संगठन का कार्य गायत्री मंत्र की मूल भावना (प्रज्ञा का परिष्कार) के अनुसार है। गायत्री परिवार जीवन जीने कि कला के, संस्कृति के आदर्श सिद्धांतों के आधार पर परिवार,समाज,राष्ट्र युग निर्माण करने वाले व्यक्तियों का संघ है।

वसुधैवकुटुम्बकम् की मान्यता के आदर्श का अनुकरण करते हुये हमारी प्राचीन ऋषि परम्परा का विस्तार करने वाला समूह है गायत्री परिवार।
एक संत, सुधारक, लेखक, दार्शनिक, आध्यात्मिक मार्गदर्शक और दूरदर्शी युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा स्थापित यह मिशन युग के परिवर्तन के लिए एक जन आंदोलन के रूप में उभरा है

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी सम्पर्क सूत्रसंपादित करें