लक्षण जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचरित होते हैं अनुवांशिक लक्षण कहलाते हैं। संचरण की विधियों और कारणों के अध्ययन को जेनेटिक कहते हैं इसकी जानकारी सर्वप्रथम Austria निवासी जोहान मैंडल ने दी इसीलिए उन्हें अनुवांशिकी का जनक कहा जाता है आधुनिक ज्ञान के अनुसार कहा जाता है कि किसी भी जीवधारी में प्रोटीन संश्लेषण उन समस्त अनुवांशिक संकेतों के प्रतिबिंब को व्यक्त करता है जो डीएनए में अंतर्निहित रहते हैं और डीएनए में न्यूक्लियोटाइड क्रम विशिष्ट प्रोटीन की संरचना व संश्लेषण की गतिओ का नियंत्रण करके अपना कार्य करते हैं । जॉर्ज बीटल एवं एडवर्ड के द्वारा प्रतिपादित एक जीन एक एंजाइम सिद्धांत के अनुसार प्रत्येक एंजाइम एक विशेष दिन के द्वारा नियंत्रित रहता है तथा एक एंजाइम एक से अधिक जिनके द्वारा नियंत्रण में होते हैं अतः संपूर्ण कोशिश की उपाधि एंजाइम के माध्यम के द्वारा जिलों से नियंत्रित होती है।