अल-जाहिज़ एक अरब गद्य लेखक और साहित्य के काम के लेखक, मुताज़िला धर्मशास्त्र और राजनीतिक-धार्मिक नीतिशास्त्र के लेखक थे।[1]

अल-जाहिज़

अल-जाहिज़ की क़तरी डाक टिकट
जन्म अबू अस्मान उमरो बहरुल-किनानी अल-बसरी
776
बसरा (इराक़), ख़िलाफ़त ए अब्बासिया
देहांत दिसंबर 868 / जनवरी 869
बसरा (इराक़), ख़िलाफ़त ए अब्बासिया
युग Medieval era
क्षेत्र Muslim scholar
मुख्य रुचियाँ अरबी साहित्य

जीवन-कालसंपादित करें

 
अल-जाहिज़ द्वारा किताब-उल-हैवान (जानवरों की पुस्तक) से एक जिराफ़।

जाहिज़ का पूरा नाम अबू अस्मान उमरो बहरुल-किनानी अल-बसरी था और वह 776 ईस्वी में बसरा (इराक़) में पैदा हुए थे। उनका ख़ानदान बेहद ग़रीब था और उनके दादा ऊंट चराते थे। उस ज़माने में मुताज़िला संप्रदाय जड़ पकड़ रहा था। ये ख़िलाफ़त ए अब्बासिया के उदय का समय था। अब्बासी ख़लीफ़ा हारून अल रशीद और मामून अल रशीद का दौर, किताबघरों, शैक्षिक बहसों का दौर था। अल-जाहिज़, उन लोगों के लिए भी आलोचनात्मक था जो मौखिक हदीसों का अनुसरण करते थे, अपने हदीसवादी विरोधियों को अल-नबीता ("अवमानना") के रूप में संदर्भित करते थे।[2]

किताबसंपादित करें

 
अंडे के साथ एक घोंसले में एक शुतुरमुर्ग (स्ट्रूथियो कैमलस) का चित्रण अल-जाइतो की किताब-उल-हैवान का एक पृष्ठ। बसरा
  • किताब-उल-हैवान - इस इंसाइक्लोपीडियाई किताब में उन्होंने साढ़े तीन सौ जानवरों का हाल बयान किया है।[3] जाहिज़ इस बात पर सहमत थे कि जानवरों की एक नस्ल विभिन्न कारणों से दूसरी नस्ल में बदल सकती है। जाहिज़ का विचार था कि भोजन, पर्यावरण और जगह ऐसे कारक हैं जो जानवरों को प्रभावित कर सकते हैं और उन्हीं के प्रभाव से जानवरों की विशेषताएं बदल जाती है।[4] अल-जाहिज़ इसके अलावा अस्तित्व और प्राकृतिक चयन के लिए संघर्ष का वर्णन करता है।[5][6]
  • किताब अल-बुख़लाई

मृत्युसंपादित करें

दिसंबर 868 / जनवरी 869 में 92 साल की उम्र में आलमारी से एक किताब निकालते समय एक भारी-भरकम आलमारी उन पर आ गिरी और और वह मर गया।[7][8]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "डार्विन से पहले बंदर से इंसान बनने के सफ़र को बताने वाला मुस्लिम विचारक". मूल से 15 जून 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 12 अप्रैल 2020.
  2. Zaman, Muhammad Qasim (1997). Religion and Politics Under the Early 'Abbasids: The Emergence of the Proto-Sunni Elite. Leiden: E.J. Brill. पृ॰ 55. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-9-00410-678-9.
  3. "Islam's evolutionary legacy". मूल से 2 दिसंबर 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 12 अप्रैल 2020.
  4. "जब काबे की हिफ़ाज़त के लिए एक सांप तैनात करना पड़ा". मूल से 14 अक्तूबर 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 12 अप्रैल 2020.
  5. "Darwin's Ghosts, By Rebecca Stott". independent.co.uk. मूल से 5 जून 2012 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 19 June 2012.
  6. "Dawkins al jahiz".
  7. Pellat, C. (1990). "Al-Jahiz". प्रकाशित Ashtiany, Julia; Johnstone, T.M.; Latham, J.D.; Serjeat, R.B.; Rex Smith, G. (संपा॰). Abbasid Belles Lettres. Cambridge, UK: Cambridge University Press. पृ॰ 81. अभिगमन तिथि 10 January 2017. A late tradition clams that Jahiz...was smothered to death under an avalanche of books.
  8. al-Ṣūlī, Muḥammad ibn Yaḥyá (1998). Kniga listov. Sankt-Peterburg: T͡Sentr "Peterburgskoe vostokovedenie". पृ॰ 392.