अशोक अग्रवाल

जन्म : 2 फरवरी 1948, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ में।

शिक्षा : एम. ए. (हिन्दी साहित्य) मेरठ विश्वविद्यालय से।

रचना-कर्म : पहली कहानी ‘अवमूल्यन’ सुप्रसिद्ध साप्ताहिक पत्रिका ‘धर्मयुग’ में प्रकाशित। हिन्दी की प्रायः सभी महत्वपूर्ण पत्रा-पत्रिकाओं यथा साप्ताहिक हिन्दुस्तान, सारिका, ज्ञानोदय, माध्यम, नया प्रतीक, कहानी, नई कहानियाँ, हंस, कथादेश, पहल, नवभारत टाइम्स, जनसत्ता आदि में लगभग पाँच दशकों से कहानियाँ, लेख, यात्रा-वृतांत, संस्मरण, आलोचना निरंतर प्रकाशित।

वर्ष 1983 में जापान प्रवास के दौरान ओसाका विश्वविद्यालय में हिन्दी भाषा विभाग में दो व्याख्यान।

संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2003-2004 में दो वर्ष के लिए सीनियर फैलोशिप। इस फेलोशिप के अन्तर्गत पिथौरागढ़ उत्तराखण्ड की उत्तरी सीमा पर स्थित धारचूला तहसील की काली और धौली नदियों की उपत्यका तथा मुनस्यारी तहसील की गौरी और रामगंगा उपत्यका में निवास करने वाली शौका जनजाति की अनूठी संस्कृति और लोक जीवन का ‘जोहार घाटियाँ : धरती और लोग’ शीर्षक के अंतर्गत शोधपरक गहन अध्ययन।

वर्ष 1994 में राज्य संदर्भ केन्द्र, प्रौढ़ शिक्षा संस्थान, राजस्थान द्वारा प्रायोजित केरल-लक्षद्वीप यात्रा (चालीस दिन)। लक्षद्वीप स्थित अनेक टापूओं का भ्रमण व वहाँ के इतिहास, भूगोल और जनजीवन पर आधारित सचित्रा पुस्तक ‘मूँगे के टापू और सागरपुत्रा’ का प्रौढ़ शिक्षा संस्थान, राजस्थान द्वारा प्रकाशन।

राष्ट्रीय नाटय विद्यालय दिल्ली के छात्रों द्वारा देवेन्द्र राज अंकुर के निर्देशन में ‘मसौदा गाँव का बूढ़ा’ कहानी की भव्य नाट्य प्रस्तुति।

‘यायावर’ नाट्य संस्था (लखनऊ) द्वारा ‘नाटे और दूसरे’ कहानी पर आधारित नाटक ‘हमारा कोई नाम नहीं’ की अनेकानेक प्रस्तुतियाँ।

आकाशवाणी के दिल्ली व अन्य केन्द्रों से कई कहानियों का प्रसारण। दूददर्शन पर कई वार्ताएँ प्रसारित। अनेक राष्ट्रीय स्तर के साहित्यिक सम्मेलन व संगोष्ठियों में सक्रिय हिस्सेदारी।

सुप्रसिद्ध शिक्षाविद और लेखक डॉॉ कृष्ण कुमार द्वारा ‘मकर संक्रांति’ कहानी का दिल्ली विश्वविद्यालय के विशेष हिन्दी पाठ्यक्रम में चयन।

प्रकाशित कृतियाँ

कहानी संग्रह : उसका खेल (1973), संकरी गली में (1979), उसके हिस्से की नींद (1988), मामूली बात (1973),   10 प्रतिनिधि कहानियां (2003), मसौदा गांव का बूढ़ा (2005), आधी सदी का कोरस : संपूर्ण कहानियाँ (2019)

उपन्यास : वायदा माफ गवाह (1975), काली और कलंदर (2002)

यात्रा वृतांत : किसी वक्त किसी जगह (2003)

‘वायदा माफ गवाह’ उपन्यास मराठी तथा मलयालम में अनूदित व प्रकाशित। अनेकानेक कहानियों का विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद व कई कहानियाँ अनेक प्रतिनिधि महत्वपूर्ण संकलनों में सम्मिलित।

पुरस्कार तथा सम्मान

पहला कहानी संग्रह ‘उसका खेल’ शिक्षा मंत्रालय मध्यप्रदेश शासन द्वारा अखिल भारतीय मुक्तिबोध पुरस्कार से सम्मानित, 1975। उपन्यास ‘वायदा माफ गवाह’ उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा पुरस्कृत, 1977।

आजकल अंतरंग रहे अनेक वरिष्ठ व समकालीन रचनाकारोंµ नागार्जुन, शमशेर बहादुर सिंह, त्रिलोचन, निर्मल वर्मा, लक्ष्मीधर मालवीय, विनोद कुमार शुक्ल, आदि के साथ व्यतीत आत्मीय क्षणों के संस्मरणों की श्रृंखला में रचनारत।

संपर्क : 64, रेवती कुंज हापुड़µ 245101

फोन : 8265874186