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असम राइफल्स का गठन 1835 में कछार लेवी के नाम से किया गया था। यह देश का सबसे पुराना पुलिस बल है। इसमें 46 बटालियन हैं। इस पर पूर्वोत्तर क्षेत्र की आंतरिक सुरक्षा और भारत-म्यांमार सीमा की सुरक्षा का दोहरा उत्तरदायित्व है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के लोंगों को राष्ट्रीय मुख्यधारा में लाने में असम राइफल्स की भूमिका सराहनीय रही है। इस बल को प्यार से ‘पूर्वोत्तर का प्रहरी’ और ‘पर्वतीय लोगों का मित्र(Friends of north east people)’ कहा जाता है वर्तमान में असम राइफल्स का प्रशासकीय नियंत्रण ग्रह मंत्रालय के पास है जबकि इसका संचालन (बेतन, भत्ता) नियंत्रण रक्षा मंत्रालय के पास है।

  • इसका मुख्यालय मेघालय के शिलांगuy में है!

जब इसका गठन हुआ था उस समय इसमें 750 जवान थे और उसका काम सिर्फ असम के चाय बागानों और उनकी संपत्तियों की आदिवासियों के हमले से रक्षा करना था। बाद में इसे अविभाजित असम की सीमाओं की रक्षा के लिए तैनात किया गया। वर्तमान समय में इसकी 46 बटालियन हैं जिनमें फ़ौजियों की संख्या 46,000 है।