असिता ईसा पूर्व ६ठवीं शताब्दी के एक तपस्वी सन्त थे जिन्होंने सिद्धार्थ गौतम के जन्म पर उनके असाधारण होने की भविष्यवाणी की थी। ऐसा कहा जाता है कि असित और राजा शुद्धोधन (सिद्धार्थ के पिता) बचपन के साथी थे। सिद्धार्थ के जन्म पर वे पहली बार महल पधारे। शिशु की अद्वितीय महानता और ईश्वरीय गुणों से अवगत असित जब नवजात शिशु से मिले तो उन्होंने शिशु के चरणों में माथा टेका। शिशु के चरण असित की जटाओं में फँस गए। महात्मा रो पड़े। राजा ने पूछा ऐसी शुभ घड़ी में आप रोते क्यों हैं? महात्मा ने कहा मैं बूढ़ा हो गया हूँ और इस होने वाले महापुरुष के ऐश्वर्य से वंचित रहूंगा।

गान्धार से प्राप्त तीसरी/चौथी शताब्दी की पट्टिका जिसमें असित की भविष्यवाणी को दर्शाया गया है। (Rietberg Museum, Zurich; Inv. No. RVI 11)

असित के उल्लेखसंपादित करें

  • (1) महर्षि कण्व के आश्रम में दुष्यन्त और शकुन्तला के प्रेम विवाह से उत्पन्न पुत्र जो भरत के नाम से विख्यात है। असित, सर्वदमन और भारत दौष्यन्ति इसके अप्रचलित नाम हैं। इनके भरत नाम पर ही इस देश का नाम भारत पड़ा।
  • (2) असित काश्यप अथवा असित देवल - एक सूक्तद्रष्टा। कश्यप का पुत्र तथा हिमालय की कन्या एकपर्णा का पति।

सन्दर्भसंपादित करें

Narada (1 January 2006). The Buddha and His Teachings. Jaico Publishing House. p. 2. ISBN 978-81-7992-617-8.

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें