आगस्तावेस्टलैण्ड हेलिकॉप्टर घोटाला

आगस्तावेस्टलैण्ड हेलिकॉप्टर घोटाला भारत द्वारा आगस्तावेस्टलैण्ड कम्पनी से खरीदे जा रहे हेलिकॉप्टरों से सम्बन्धित है। यह २०१३-१४ में सामने आया। इसमें कई भारतीय राजनेताओं एवं सैन्य अधिकारियों पर आगस्तावेस्टलैण्ड से मोटी घूस लेने का आरोप है।

यूपीए-1 सरकार के समय अगस्ता वेस्टलैंड से वीवीआईपी के लिए 12 हेलिकॉप्टरों की खरीद का सौदा हुआ था। यह सौदा 3,600 करोड़ रुपए का था। इसमें 360 करोड़ रुपए की रिश्वतखोरी की बात सामने आई जिसके बाद यूपीए सरकार ने सौदा रद्द कर दिया। - एसपी त्यागी सहित 13 लोगों पर केस दर्ज किया गया था। जिस बैठक में हेलिकाॅप्टर की कीमत तय की गई थी, उसमें यूपीए सरकार के कुछ मंत्री भी मौजूद थे। इस कारण कांग्रेस पर भी सवाल उठे थे। इस फैसले में कांग्रेस के कई नेताओं के नाम भी लिए हैं।

अप्रैल २०१४ में इटली के एक न्यायालय के फैसले के अनुसार अगस्ता सौदे में घोटाला हुआ था। अदातल ने कंपनी फिनमेक्कनिका को दोषी पाया है। एक अंग्रेजी समाचार पत्र में छपी खबर के अनुसार, कोर्ट ने अपने आदेश में फिनमैकेनिका की अधीनस्थ कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड के पूर्व सीईओ ब्रूनो स्पैगनोलिनि को भी साढे़ चार साल जेल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में ओरसी को कोर्ट से राहत देने वाले आदेश को बदल भी दिया।[1] भारतीय रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, ओरसी को मिली सजा से अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में कंपनी के खिलाफ भारत का केस मजबूत होगा। इस फैसले में भारत के तत्कालीन एयर चीफ का नाम भी लिया गया है।

इसके पूर्व इटली की एक अदालत ने मई 2014 में इटली के बैंकों में जमा 1818 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी भारत को लेने की अनुमति दे दी थी। इस पर अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की शरण में चली गई और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति बी एन श्रीकृष्ण को मध्यस्थ के तौर पर नामित किया। इस पर भारत ने न्यायमूर्ति बी पी जीवन रेड्डी को दूसरा मध्यस्थ नियुक्त किया। सितंबर 2014 में जब दोनों पक्ष तीसरे मध्यस्थ पर सहमत नहीं हुए तो अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने प्रोफेसर विलियम पार्क को मामले के निपटारे के लिए नियुक्त किया।

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाला: कंपनी के दो बडे़ अधिकारियों को जेल". मूल से 9 मई 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 26 अप्रैल 2016.

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