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आचार्य वामन (८वीं शताब्दी का उत्तरार्ध - ९वीं शताब्दी का पूर्वार्ध) प्रसिद्ध अलंकारशास्त्री थे। उनके द्वारा प्रतिपादित काव्यलक्षण को रीति-सिद्धान्त कहते हैं। वामन द्वारा रचित काव्यालङ्कारसूत्र, काव्यशास्त्र का दर्शन निर्माण का प्रथम प्रयास है। यह ग्रन्थ सूत्र रूप में है। वे रीति को काव्य की आत्मा कहते हैं।