जब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वस्तुओ और सेवाओ के उत्पादन में निरन्तर गिरावट हो रही हो और सकल घरेलू उत्पाद कम से कम तीन महीने डाउन ग्रोथ में हो तो इस स्थिति को विश्व आर्थिक मन्दी कहते हैं। सन् 1929 में शुरुआती आर्थिक मंदी आधुनिक विश्व के आर्थिक इतिहास में सर्वाधिक गंभीर उथल पुथल में से एक थी

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