उत्तरायण सूर्य

सूर्य की एक दशा
(उत्तरायण से अनुप्रेषित)

उत्तरायण सूर्य, सूर्य की एक दशा है।'उत्तरायण' (= उत्तर + अयन) का शाब्दिक अर्थ है - 'उत्तर में गमन'। जब सूर्य की दशा उत्तरायण है तब क्षितिज पर यदि सूर्योदय होने के बिंदु को प्रतिदिन देखा जाए तो वह बिंदु धीरे धीरे उत्तर की और बढ़ता प्रतीत होगा । इसी प्रकार दिन के समय सूर्य के उच्चतम बिंदु को यदि दैनिक तौर पर देखा जाये तो उत्तरायण के दौरान वह बिंदु हर दिन उत्तर की और बढ़ता हुआ दिखेगा। उत्तरायण की दशा में पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में दिन लम्बे होते जाते हैं और रातें छोटी। उत्तरायण का आरंभ 14 जनवरी को होता है। यह दशा 21 जून तक रहती है। इस दिन अयनांत की स्थिति आती है उसके बाद दक्षिणायन प्रारंभ होता है जिसमें दिन छोटे और रात लम्बी होती जाती है , फिर एक और अयनांत है और फिर से उत्तरायण आरम्भ हो जाता है।

सूर्य के उच्चतम बिंदु का उत्तर व दक्षिण में जाना

मकर संक्रांति उत्तरायण से भिन्न है। मकर संक्रांति वर्तमान शताब्दी में 14 जनवरी को होती है।

Illustration of the observed effect of Earth's axial tilt.
उत्तरायण २१ या २२ दिसम्बर को होता है

मकर संक्रांति और उत्तरायण भ्रमसंपादित करें

मकर संक्राति और उत्तरायण अलग अलग खगोलीय घटनाएँ हैं। वर्तमान में मकर संक्रान्ति १४/१५ जनवरी को होती है और उत्तरायण दशा २१ दिसंबर को ही आरम्भ हो जाती है। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश मकर संक्राति है , इस प्रकार हर राशि के लिए एक संक्रान्ति होती है , लेकिन मकर संक्रान्ति उत्सव प्रसिद्ध है। उत्तरायण सूर्य की दशा है जिसमे सूर्य उत्तर को गमन करते प्रतीत होते हैं। आधुनिक कलेण्डर इस प्रकार से बनाया गया है कि अयनांत और विषुव सदैव उसी तिथि पर रहें अर्थात अधिवर्ष का थोड़ा बहुत प्रभाव छोड़ दिया जाए तो मौटे तौर सदैव 20/21 मार्च और 22/23 सितम्बर को ही दिन रात बराबर होंगे। इसी प्रकार अयनांत (उत्तरायण , दक्षिणायन दशा का आरम्भ और अंत )भी २१/२२ दिसंबर और २०/२१ जून को ही होंगे। इससे कलेण्डर के सापेक्ष मौसम सदैव एक से ही रहेंगे। लेकिन सूर्य का मकर में प्रवेश उत्तरायण के सापेक्ष आगे बढ़ता जा रहा है । ये बदलाव करीब ७० वर्षों में एक दिन का होता है। इस प्रकार अगले ७० वर्षों में मकर संक्रान्ति एक और दिन आगे बढ़ जाएगी । अब से करीब १७५० वर्ष पूर्व करीब ७० वर्षों के समय अन्तराल तक मकर संक्रान्ति और उत्तरायण एक ही दिन होते थे। तभी ये शायद ये भ्रम प्रचलित हैं कि मकर संक्रान्ति ही उत्तरायण है।

किसी एक तिथि से आगे बढ़ने के बाद मकर संक्रान्ति का पुनः उसी तिथि पर आ जाना करीब २६००० वर्षों बाद होगा। माना जाता है कि इस अवधि को ही महायुग कहा गया है।


मकर संक्रांति की वर्तमान तिथि में बदलाव का कारणसंपादित करें

अयनांत , विषुवों के समय UTC, मकर संक्रांति का समय IST[1]
वर्ष विषुव
मार्च
अयनांत
जून
विषुव
सितंबर
अयनांत
दिसंबर
मकर संक्रांति
जनवरी
दिन समय दिन समय दिन समय दिन समय दिन समय
2016 20 04:31 20 22:35 22 14:21 21 10:45 15 01:26
2017 20 10:29 21 04:25 22 20:02 21 16:29 14 07:38
2018 20 16:15 21 10:07 23 01:54 21 22:22 14 13:46
2019 20 21:58 21 15:54 23 07:50 22 04:19 14 19:50
2020 20 03:50 20 21:43 22 13:31 21 10:03 15 02:06
2021 20 09:37 21 03:32 22 19:21 21 15:59 14 08:14
2022 20 15:33 21 09:14 23 01:04 21 21:48 14 14:28
2023 20 21:25 21 14:58 23 06:50 22 03:28 14 20:43
2024 20 03:07 20 20:51 22 12:44 21 09:20 15 02:42
2025 20 09:02 21 02:42 22 18:20 21 15:03 14 08:54

वर्तमान में मकर संक्रांति १४ या १५ जनवरी की होती है। ये बदलाव क्यों होता रहता है? वस्तुतः अधिवर्ष (Leap Year) के वाले वर्ष मकर संक्रान्ति १५ जनवरी की होती है अन्यथा १४ जनवरी की ही होती है। मकर संक्रांति की वर्तमान तिथि में बदलाव का कारण अधिवर्ष (Leap Year) है। एक वर्ष में करीब ३६५.२४ दिन होते हैं। दो संक्रांतियों के बीच में भी इतना ही अंतर होता है। लेकिन हम एक वर्ष में केवल ३६५ दिन ही रखते हैं। इस तरह हमारा वर्ष छोटा एक चौथाई दिन छोटा होता है। चार वर्षों में हम पूरा एक दिन पीछे हो जाते है और एक दिन बढ़ाना पड़ता है। लेकिन मकर संक्रांति जनवरी में ही होती और अधिवर्ष का दिन हम फरवरी में बढ़ाते हैं। तो कह सकते हैं कि मकर संक्राति तो अपने सही समय पर ही पर कैलेंडर अभी पीछे ही होता है और इसलिए एक वर्ष मकर संक्रान्ति १५ जनवरी की होती। २९ फरवरी वाला दिन बढ़ाते ही कलेण्डर फिर ठीक हो जाता है और मकर संक्रांति फिर से १४ दिन की होने लगती है। अधिवर्ष (leap year ) का ठीक ऐसा प्रभाव अन्य घटनाओं पर भी होता है , सितम्बर में विषुव ( दिन रात बराबर होना ) कभी २२ सितम्बर को होता है कभी २३ सितम्बर को। दी गई सारणी में समयों का अध्ययन करने से लीप वर्ष का सभी सौर घटनाओं पर प्रभाव पता चलेगा।

वर्तमान क्रम केवल २०४७ तक चलेगा। बहुत लम्बे समय में एक और कारण से मकर संक्रान्ति के दिन में बदलाव आता है। ७० वर्षों में करीब एक दिन मकर संक्रान्ति उत्तरायण के सापेक्ष आगे बढ़ जाती है। इस कारण से मकर संक्रांति का समय २०४७ थोड़ा आगे बढ़ चुका होगा और उसके बाद अधिवर्ष और उससे पहले एक वर्ष (जैसे २०४७ , २०४८ ) को मकर संक्रान्ति १५ जनवरी की होगा और शेष दो वर्ष १४ जनवरी की होगी। सदी एक अंत तक हर चार वर्षों में से तीन में मकर संक्रांति १५ जनवरी की होगी और केवल अधिवर्ष के अगले साल ही १४ जनवरी की होगी। २१०२ में पहली बार मकर संक्रान्ति १६ जनवरी की होगी।

यह भी देखेंसंपादित करें

दक्षिणायन

अयनांत

मकर संक्रांति

विषुव

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "Solstices and Equinoxes: 2001 to 2100". AstroPixels.com. February 20, 2018. अभिगमन तिथि December 21, 2018.