उपभाषा सतति (dialect continuum) किसी भौगोलिक क्षेत्र में विस्तृत उपभाषाओं की ऐसी शृंखला को कहते हैं जिसमें किसी स्थान की उपभाषा पड़ोस में स्थित स्थान से बहुत कम भिन्नता रखती है। बोलने वालों को वह दोनों उपभाषाएँ लगभग एक जैसी प्रतीत होती हैं, लेकिन यदी एक-दूसरे से दूर स्थित उपभाषाओं की तुलना की जाये तो वे काफ़ी भिन्न प्रतीत होती हैं और बहुत दूर स्थित उपभाषाओं को बोलने वालो को एक-दूसरे को समझने में कठिनाई हो सकती है।[1]

यूरोप के कई भागों में उपभाषा सतति देखी जाती है

भारतीय उपमहाद्वीप में यह कई स्थानों पर देखा जाता है। मसलन ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा की हिन्दको भाषा से दक्षिण चलकर पोठोहारी भाषा, पंजाबी भाषा, सराइकी भाषा, सिन्धी भाषा, कच्छी भाषा, गुजराती भाषा, अहिराणी भाषा, और फिर मुम्बई क्षेत्र में मराठी भाषा तक एक विशाल उपभाषा सतति है, जिसमें एक बस्ती से पड़ोस की बस्ती तक कहीं भी लोगों को आपस में बोलचाल में कठिनाई नहीं होती लेकिन यदी हिन्दको की मराठी से सीधी तुलना की जाये तो वे बहुत भिन्न हैं। यूरोप, उत्तर अफ़्रीका के मग़रेब क्षेत्र और विश्व के अन्य भागों में यह बहुत देखा जाता है। पिछले १०० वर्षों में कई देशों में भाषाओं के मानकीकरण से कई उपभाषाएँ विलुप्त हो गई हैं, जिस से ऐसे कई उपभाषा सतति क्षेत्रों का भी अन्त हो गया है।[2]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Cruse, D.A. (1986). Lexical Semantics. Cambridge: Cambridge University Press. p. 71. ISBN 0-521-27643-8.
  2. Bloomfield, Leonard (1935). Language, George Allen & Unwin: London, p. 51.