उमराव सिंह यादव

विक्टोरिया क्रॉस के प्राप्तकर्ता

कप्तान उमराव सिंह यादव वी.सी., दुश्मन के सामने वीरता के लिए ब्रिटिश और राष्ट्रमंडल सेनाओं को दिए जाने वाले सर्वोच्च और सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार विक्टोरिया क्रॉस (वीसी) के एक भारतीय प्राप्तकर्ता थे। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वे रॉयल आर्टिलरी या रॉयल इंडियन आर्टिलरी में एकमात्र गैर-कमीशन अधिकारी थे जिन्हें विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित किया गया था. वे १९१२ (जब भारतियों को वीसी से सम्मानित होने कि योग्यता मिली) से १९४७ (भारतीय स्वतंत्रता) के बीच वीसी द्वारा सम्मानित ४० भारतीय सैनिकों में से अंतिम जीवित सैनिक हैं.

[[कप्तान]]
उमराव सिंह यादव
वी.सी.
जन्म २१ नवम्बर १९२० 
पलड़ा, हरियाणा, भारत
देहांत २१ नवम्बर  २००५ (८५ वर्ष)
नई दिल्ली, भारत
निष्ठा

 British India[ब्रिटिश भारत]]

 India[भारत]]
सेवा/शाखा

साँचा:Country data British India[ब्रिटिश भारतीय सेना]]

 भारत सेना[भारतीय सेना]]
सेवा वर्ष १९३९-१९६५ 
उपाधि

Subedar Major - Risaldar Major of the Indian Army.svg [[सूबेदार मेजर]] [[ब्रिटिश भारतीय सेना]]

Captain of the Indian Army.svg [[कप्तान]] [[भारतीय सेना]]
दस्ता [[राजसी भारतीय तोपखाना]]
युद्ध/झड़पें द्वितीय विश्व युद्ध
सम्मान

Victoria Cross (UK) ribbon.pngविक्टोरिया क्रॉस]]
IND Padma Bhushan BAR.png [[पद्म भूषण]]
1939-45 Star & Battle of Britain clasp.png [[१९३९-१९४५ स्टार]]
Ribbon - Africa Star & Rosette.png [[अफ्रीका स्टार]]
Ribbon - Burma Star & Rosette.png [[बर्मा स्टार]]
Ribbon - War Medal.png [[युद्ध पदक १९३९-१९४५]]
Queen Elizabeth II Golden Jubilee Medal ribbon.png [[स्वर्ण जयंती पदक]]
QEII Silver Jubilee Medal ribbon.png [[रजत जयंती पदक]]

Ribbon - QE II Coronation Medal.png [[कोरोनेशन पदक]]

प्रारंभिक जीवन संपादित करें

मोहर सिंह के पुत्र उमराव सिंह का जन्म [[दिल्ली]] से ५० किमी दूर  [[हरियाणा]] राज्य के [[झज्जर]] जिले (उस समय के संयुक्त [[पंजाब]] के [[रोहतक]] जिले के) [[पलड़ा]] गाँव के एक [[हिन्दू]] [[यादव]] ([[अहीर]]) परिवार में हुआ था.[1][2]

 उन्होंने एक स्थानीय स्कूल में शिक्षा ग्रहण कि और १९३९ में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सेना में शामिल हो गए। १९४२ में उन्हें भारतीय सेना में रॉयल भारतीय तोपखाने में हवलदार (सार्जेंट) में पदोन्नत किया गया।

अंतिम दिन संपादित करें

 
सेंट जॉर्ज के गैरीसन चर्च, वूलविच, लंदन में आर.ए. विक्टोरिया क्रॉस मेमोरियल. सिंह का नाम सबसे आखिर में जोड़ा गया था (नीचे दाएं)

 जुलाई २००५ में प्रोस्टेट कैंसर का पता चलने के बाद, उनका २१ नवंबर, २००५ को अपने ८५वें जन्मदिन पर नई दिल्ली में सेना अनुसंधान और रेफरल अस्पताल में निधन हो गया। उनके गांव में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें भूपिंदर सिंह हुड्डा (हरियाणा के मुख्यमंत्री), जनरल जोगिंदर जसवंत सिंह (सेना प्रमुख), और लेफ्टिनेंट जनरल चरनजीत सिंह (आर्टिलरी के महानिदेशक) भी शामिल हुए। उनकी पत्नी, विमला की मृत्यु पहले ही हो चुकी थी, लेकिन उनके दो बेटे और एक बेटी बचे हैं। 

व्यक्तिगत कठिनाई और पर्याप्त पेशकशों के बावजूद, सिंह ने अपने जीवनकाल में अपना पदक बेचने से मना कर दिया, और कहा कि पदक बेचने से "लड़ाई में मरने वाले सैनिकों के सम्मान को दाग" लगेगा।

रॉयल आर्टिलरी बैरक्स के निकट लंदन के वूलविच में सेंट जॉर्ज की गैरीसन चर्च के पास में रॉयल आर्टिलरी के विक्टोरिया क्रॉस विजेताओं के स्मारक में उनका अंतिम नाम शामिल किया गया था।



पदक से सम्मानित कियासंपादित करें

अन्य प्रशंसा पत्रसंपादित करें

  • महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के राज्याभिषेक पदक (१९५३)
  • रानी एलिजाबेथ द्वितीय की रजत जयंती पदक (१९७७)
  • महारानी एलिजाबेथ द्वितीय स्वर्ण जयंती पदक (२००२)

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Indian information, Volume 16. Press Information Bureau, Government of India. 1945. पृ॰ 783. अभिगमन तिथि 13 October 2011..
  2. The Illustrated Weekly of India (1970): Volume 91, Issue 3, Page-4, "Umrao Singh (Rohtak Ahir) won the Victoria Cross during the second world war"
  3. "Padma Awards" (PDF). Ministry of Home Affairs, Government of India. 2016. मूल से 15 नवंबर 2014 को पुरालेखित (PDF). अभिगमन तिथि January 3, 2016.

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें