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एम.पी.ई.जी ४ ISO/IEC १४४९६-१४:२००३, डिजिटल ध्वनि संकेत (ऑडियो सिग्नल) संपीड़न तकनीक होती है। यह में एमपी3 से कुछ ज्यादा अलग नहीं है, लेकिन एमपी3 की तुलना में यह ज्यादा जटिल होता है। यदि सात बार डी बोलना है, तो ऑडियो फॉर्मेट में इसे डी7 के रूप में लिख दिया जाता है। इससे ऑडियो संचिका संपीड़ित (कंप्रेस) हो जाती है। ऑडियो संचिका की तुलना में वीडियो संचिका को कंप्रेस करना मुश्किल काम होता है। इसमें विशेष प्रकार के कोड तंत्र का इस्तेमाल किया जाता है। कंप्रेशन और डिकंप्रेशन के जरिए चित्रों को फ्रीक्वेंसी डोमेन में स्थानांतरित किया जाता है। इसे कोडेक (कोडर-डीकोडर) कहा जाता है। एमपी4 प्लेयर साधारण तरीके से काम करता है।

एम.पी-४ (एमपीईजी-४ पार्ट १४)
संचिकानाम विस्तार .mp4
इंटरनेट मीडिया प्रकार video/mp4, audio/mp4, application/mp4
प्रकार कोड mpg4
द्वारा विकसित ISO
फॉर्मैट का प्रकार मीडिया कंटेनर
का कंटेनर वीडियो
से विस्तृत QuickTime .mov एवं एमपीईजी-४ पार्ट १२
मानक ISO/IEC १४४९६-१४

एमपी4 का सबसे बड़ा फायदा है इसकी भण्डारण (स्टोरेज) क्षमता। उदाहरण के तौर पर एक पूरी हिन्दी फिल्म कम से कम दो सीडी में आती है। यदि फिल्म की संचिका को एमपी4 में बदला जाए, तो एक एमपी4 में कम से कम चार-पांच फिल्म आ सकती है। कई मामलों में जहां एमपी4 तकनीक लाभदायक है, तो इस तकनीक के कई नुकसान भी हैं। एमपी 4 की वजह से पाइरेसी की समस्या बढ़ी है। इन संचिकाओं को डाउनलोड करने में समय काफी लगता है। साथ ही इनके बीच-बीच में रुकने की समस्या भी आती है।

जैसे एमपीथ्री संचिका किसी म्यूजिक या ऑडियो संचिका की गुणवत्ता को प्रभावित किए बिना संपीड़ित कर बनाई जाती हैं। ठीक उसी तरह एमपी4 वीडियो संचिका को संपीड़ित कर बनाई जाती है। यह नई तकनीक वीडियो संचिका को इतना घटा देती है कि उन्हें स्टोर करना बेहद आसान हो जाता है। ऑडियो-वीडियो के लिए बनने वाली भारी-भरकम संचिका संपीड़ित होकर एमपी4 के रूप में आती है।

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