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नागमाता कद्रि का पुत्र एरावत नागवन्श का महाप्रतापी राजा हुआ, उसकी पत्नी का नाम शोभा था, दोनो भगवान शन्कर के परम भक्त थे, लेकिन दोनों की एक भी सन्तान नही थी, एक दिन भगवान शन्कर नें उन्हे दर्शन दिए और कहा कि तुम्हे एक पुत्री रत्न की प्राप्ती होगी जो आठ महाप्रतापी पुत्रों को जन्म देगी। शने: शने: समय बीतता गया फिर वह दिन भी आ गया जब उनके यहां एक पुत्री नें जन्म लिया, जिसका नाम एरावती/शोभावति पड़ा। समय आने पर इनका विवाह चित्रगुप्तजी से हुआ, जिससे इनके आठ पुत्रों नें जन्म लिया जो चारु, चितचारु, मतिभान, सुचारु, चारुण, हिमवान, चित्र और अतिन्द्रिय कहलाए।