1296 में दिल्ली के सुल्तान बने अलाउद्दीन ख़िलजी। कि ख़िलजी की चार पत्नियां थीं जिनमें से एक गुजरात के राजा की पूर्व पत्नी और दूसरी यादव राजा की बेटी थीं.1316 तक दिल्ली के सुल्तान रहे अलाउद्दीन ख़िलजी ने कई छोटी रियासतों पर हमले कर या तो उन्हें सल्तनत में शामिल कर लिया था या अपने अधीन कर लिया था। 1299 में ख़िलजी की सेनाओं ने गुजरात पर बड़ा हमला किया था. इस हमले में गुजरात के वाघेला राजा कर्ण वाघेला (जिन्हें कर्णदेव और राय कर्ण भी कहा गया है) की बुरी हार हुई थी.इस हार में कर्ण ने अपने साम्राज्य और संपत्तियों के अलावा अपनी पत्नी को भी गंवा दिया था. तुर्कों की गुजरात विजय से वाघेला राजवंश का अंत हो गया था और गुजरात के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ा था.कर्ण की पत्नी कमला देवी से अलाउद्दीन ख़िलजी ने विवाह कर लिया था. गुजरात के प्रसिद्ध इतिहासकार मकरंद मेहता कहते हैं, "ख़िलजी के कमला देवी से विवाह करने के साक्ष्य मिलते हैं."मकरंद मेहता कहते हैं, "पद्मनाभ ने 1455-1456 में कान्हणदे प्रबंध लिखी थी जो ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित थी. इसमें भी राजा कर्ण की कहानी का वर्णन है."मेहता कहते हैं, "पद्मनाभ ने राजस्थान के सूत्रों का संदर्भ लिया है और उनके लेखों की ऐतिहासिक मान्यता है. इस किताब में गुजरात पर अलाउद्दीन ख़िलजी के हमले का विस्तार से वर्णन है."मेहता कहते हैं, ख़िलजी की सेना ने गुजरात के बंदरगाहों को लूटा था, कई शहरों को नेस्तानाबूद कर दिया था.