Well कुआँ:--धरती से स्वक्ष पानी निकालने का सबसे पहला और सरल तरीका कुआँ है।कुआँ का आकार गोलाकार या वृत के समान होते हैं।इसका ब्यास 3 फिट से 8फिट तक हो सकती है।इसकी गहराई 30फिट से लेकर 100फिट तक हो सकती है ।इसका निर्माण मनुष्य आज के किसी भी प्रकार के मशीनरी के उपयोग बिना भी किया जा सकता है।कुआँ का निर्माण के लिए तबतक खुदाई की जाती है जब तक की बालू या पत्थरों से रिसते हुये स्वच्छ पानी जमा न होने लगे। कुआँ की खुदाई हमेशा दिन में ही कराना चाहीये।कुआँ को धरती माँ की गोद कहा जाता है।इसलिए धरती माँ की पूजा-अर्चना करने के उपरांत ही खुदाई शुरू की जाती रहीं हैं। स्वच्छ पानी मिल जाने के उपरांत जितनी गहराई तक मिट्टी होती है या जहाँ तक संभव हो उतना गहराई तक गोलाकार या वृत आकार के ईट और सीमेंट से दिवाल का निमार्ण कराया जाता है,ताकि पानी मे मिट्टी घुल नहीं सकें एवं कुआँ की ब्यास की परत मजबूत रहे। जहाँ जमीन मिट्टी नहीं होकर पत्थर हो वहा पत्थर को ही काटकर लगाया जाता है । सुरक्षा के लिए कुआँ का निर्माण जमीन से3से4फिट ऊपरी हिस्से तक दिवाल का निर्माण कराया जाता है ।पानी को कुआँ से बाहर निकालने के लिए एक लम्बी रस्सी मे कोइ बत॔न बाँध कर निकाला जाता है।कुआँ से सटे 5 फिट या उससे ज्यादा जमीन की मिट्टी को ईट वो सीमेंट से ढक दिया जाता है ताकि फिसलन नहीं हो सकें।कुआँ का उपयोग खेती के लिए भी किया जाता रहा है।आधुनिक युग में कुआँ में मोटर युक्त मशीनरी लगाया जाता है ताकि पानी तेजी से बाहर आ सके। कुआँ के निमार्ण से धरती में सबसे कम गहराई में पानी का लेयर बनाकर पानी निकाल सकते हैं।कुआँ का पानी जीवंत अवस्था में होतीं हैं और आज के किसी भी मशीनरी में पानी मृत अवस्था में हो सकती है। कुआँ का पानी पौष्टिकता युक्त एवं शीतल होती है।कुआँ का पानी मौसम के प्रतिकूल होती है।ठंड मे पानी ग॔म एवं ग॔मीयो में ठंडा होता है। कुआँ का निर्माण मनुष्य के जीवन-चक्र शुरू होने के समय से ही होता चला आ रहा है।इसके स्वरूप में बदलाव होते चले आ रहे हैं।कह सकते हैं कि कुआँ मनुष्य के जीवन होने मे अहम योगदान है।एक ऐसा भी पूरी दुनिया में समय आयेगा जब पीने के पानी के लिए मनुष्य को दोबारा कुआँ की पद्धति पर लौटना होगा।धरती पर प॔यावरण के सुरक्षा के लिए पेड़ और कुआँ दोनों ही बहुत जरूरी है।आज धरती से पानी का लेयर घटता चला जा रहा है,जिसका मुख्य कारण कुआँ का नहीं होना है।क्योकी बरसात के पानी को जमीन की गहराई में ले जाने का कुआँ का अहम योगदान है।सरकार को कुआँ खुदवाने पर बिशेष ध्यान देना चाहिए।कुआँ खुदवाना सबसे बड़ा पूण्य का काम होता है।इसलिए मनुष्य को अपने आने वाले पीढियों की सुरक्षा के लिए कुआँ का निर्माण करना होगा ।इंसान की जरूरत ही आविष्कार की शुरुआत होती है।कह सकते हैं कुआँ इंसान का पहला आविष्कार है।

शिव शंकर कुमार भटृ,मो0-काश्मीर गंज,पोस्ट-मसौढी,जिला- पटना, बिहार,भारत, पिन कोड-804452,मो0-9308852750

कुएँ का अन्य प्रयोगसंपादित करें

विश्व के कुछ स्थानों पर पेट्रोल और गैस-कुएँ भी मौजूद हैं। यहाँ ज़मीन की खुदाई का काम पूरा करके कई लाख क्यूबिक मीटर गैस का प्रतिदिन उत्पादन किया जाता है।[1]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें

 
चन्द बावड़ी - क्रमश: घटता हुआ चौकोर कुँवा