तुगलक वंश की समाप्ति के बाद दिल्ली सल्तनत की बागडोर खिज्र खां के हाथों में आ गई। खिज्र खां सैय्यद वंश का संस्थापक था। वह स्वयं को इस्लाम धर्म के संस्थापक मुहम्मद पैगंबर साहब का वंशज मानता था। सल्तनत काल में शासन करने वाला एकमात्र शिया वंश था। इसने सुल्तान की उपाधि धारण न कर स्वयं को रैयत ए आला की उपाधि से संतुष्ट रखा और तुगलक शासन काल के ही सिक्कों का प्रचलन अपनी अर्थ्यवस्था में चलने दिया। इसकी मृत्यु २० मई 1421 में हो गई।