खोया हीन ग्रह (Lost minor planet) एक ऐसा हीन ग्रह होता है जो खगोलशास्त्रियों द्वारा देखा गया हो लेकिन इतने कम समय के लिये कि उसकी कक्षा (ऑरबिट) ठीक से ज्ञात​ होने से पहले ही वह लुप्त होकर किसी अज्ञात​ स्थान पर चला गया हो। ऐसे खोये हीन ग्रह कभी-कभी बाद में फिर मिल जाते हैं लेकिन कभी-कभी दशकों तक फिर नहीं मिल पाते। अक्सर हीन ग्रहों की कक्षाएँ बड़े ग्रहों की तुलना में बेढंगी होती हैं जिससे उनके दृष्टि से ग़ायब​ हो जानी की सम्भावना अधिक रहती है। कुछ वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि लगभग आधे ज्ञात हीन ग्रह खोये जाते हैं। कुछ के अनुसार अंदाज़ा है कि डेढ़ लाख (१,५०,०००) से अधिक हीन ग्रह इस समय खोये हुए हैं।[1]

उदहारणसंपादित करें

१८६२ अपोलो (1862 Apollo) एक क्षुद्रग्रह (ऍस्टरोयड) है जिसे सन् १९३२ में कार्ल रायनमुथ (Karl Reinmuth) नामक खगोलशास्त्री ने ढूंढ निकाला था, लेकिन अपनी खोज के बाद यह खोया गया और फिर ४१ सालों बाद १९७३ में ही जाकर फिर मिला। इसी तरह ६९२३० हर्मीज़ (69230 Hermes) सन् १९३७ में खोजे जाने के बाद खोया गया और फिर ६६ वर्षों बाद जाकर सन् २००३ में ही दोबारा मिल पाया।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Asteroids: overview, abstracts, and bibliography (2002), by Edward C. Blair, Page 177. Books.google.com. Retrieved 2013-07-23.
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सौर मण्डल
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