गढ़वाल के निवासी विभिन्न प्रकार के वस्त्र पहनते हैं। निम्न परिवर्ती इनके वस्त्रों के चयन को प्रभावित करते हैं।

  1. परम्पराएं
  2. स्थानीय उपलब्ध सामग्री
  3. लोगों के कार्य करने की आदतें
  4. जलवायु स्थितियाँ (मुख्यतः तापमान)

जाति एवं धर्म के आधार पर यहाँ के लोगों के पहनावे में विशेष परिवर्तन नहीं पाया जाता है। उनके पहनावे में परिवर्तन के विभिन्न कारणों को ऊपर सूचीबद्ध किया गया है। यहाँ की महिलाओं के वस्त्र इन्हे खेतों में कार्य करने के लिए उपयुक्त होते हैं। महिलाओं के वस्त्रों की विशिष्टता यह है कि वे वनमार्गों से गुजरते समय झाडियों में नहीं उलझते हैं। तथापि यहाँ के लोगों के वस्त्रों पर उनकी आर्थिक स्थिति का प्रभाव स्पष्टतः दिखाई पडता है। देहरादून, ऋषिकेश एवं श्रीनगर जैसे शहरों एवं नगरों के निवासियों का पहनावा पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव के कारण परिवर्तित हो गया है। मैदानी क्षेत्रों में कार्यरत यहाँ के स्थानीय निवासी यहाँ वापिस आते समय अच्छी गुणवत्ता वाले सिले हुये वस्त्रों को यहाँ लाते हैं यहाँ के लोगों के पहनावे के आधार पर गढ़वाल को निम्न क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है।

ऊपरी गढ़वालसंपादित करें

इस भूभाग में समुद्र तल से लगभग 2300 मीटर से अधिक ऊँचाई वाले वे सभी क्षेत्र सम्मिलित हैं। जहाँ तक क्षेत्र के निवासी निवास करते हैं। गढ़वाल के ऊपरी भूभाग में भूटिया एवं गूजर जैसी जनजातियाँ निवास करती हैं। शरद ऋतु में यहाँ तीव्रतम ठंड पडती है। तथा इस भूभाग पर भारी हिमपात प्राप्त होता है। भूटिया लोग बकरी या भेडों की ऊन में स्वयं बुने ऊनी वस्त्र पहनते हैं।

यहाँ के स्थानीय पुरुष ढीली पैन्ट एवं ढीला गाउन पहनते हैं। यहाँ की महिलाएं कमर के चारों ओर एक ऊनी वस्त्र (पट्टा) तथा सिर पर ऊनी टोपी पहनती हैं। महिलाओं द्वारा पैन्ट के स्थान पर ऊन का एक ढीला अन्तः वस्त्र पहना जाता है। ऊपरी वस्त्र पुरुषों के समान ही होते हैं। यहाँ की स्थानीय महिलाएं ऊन की सफेद बास्केट के साथ ऊनी स्कर्ट भी पहनती हैं। ऊनी वस्त्रों को बिरले ही धोया जाता है तथा वस्त्रों को उनकी उपयोगी अवधि के अन्त तक पहना जाता है। यहाँ पर सूती वस्त्रों को नहीं पहना जाता है। आजकल बडे गाँवों में कुछ लोगों ने संश्लेषित (Synthetic) पैन्ट, शर्ट एवं कोट भी पहनना प्रारम्भ कर दिया है।

मध्य गढ़वालसंपादित करें

इस भूभाग में समुद्र तल से 1000 मीटर में 2300 मीटर के मध्य का पर्वतीय क्षेत्र सम्मिलित है। अलकनन्दा, भागीरथी एवं यमुना नदियों की मध्य घाटियों में रहने वाले व्यक्ति ऊनी जूटी एवं सूती वस्त्रों को पहनते हैं। पुरुष टाइट पैन्ट एवं बटन वाला लम्बा कोट या अचकन पहनते हैं। सिर पर वे गाँधी टोपी पहनते हैं। यहाँ की स्थानीय महिलाएं लम्बी स्कर्ट या घघरी, ब्लाउज पहनती है तथा सिर पर स्कार्फ के प्रकार का वस्त्र बाँधती है।

मध्यच गढ़वाल में निवास करने वाले ग्रेजर समुदाय के लोग बाजूरहित बिना सिला गाउन पहनते हैं। जो घुटने से नीचे तक लम्बा होता है। यह गाउन बकरी की ऊन से निर्मित किया जाता है। निकटतम पूर्व की अवधि में पुरुष शर्ट, पैन्ट एवं कोट भी पहनने लगे हैं। गढ़वाल के शहरी एवं अर्द्धशहरी क्षेत्रों की महिलाएं साडी ब्लाउज या पायजामा कुर्ता भी पहनने लगी है।

निम्न गढ़वालसंपादित करें

इस भूभाग में लगभग समुद्र तल से 1000 मीटर की ऊँचाई वाले क्षेत्र सम्मिलित हैं। निम्न गढ़वाल क्षेत्र गढ़वाल के अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक विकसित हो गया है तथा यहाँ के लोगों ने मैदानी क्षेत्रों एवं पश्चिमी देशों में पहने वाले पहनावे को स्वीकार कर लिया है। यहाँ के लोग शर्ट, पैन्ट, कोट, बुशशर्ट एवं सफारी सूट पहनते हैं। यहाँ की महिलाएं साडी ब्लाउज एवं पाजामा-कुर्ता पहनती हैं। पश्चिमी पहनावे का प्रभाव क्षेत्र पर अधिक दिखाई पडता है। यहाँ की नौजवान पीढी ने जीन्स एवं अन्य पश्चिमी वस्त्रों का प्रयोग बहुत अधिक मात्रा में करना प्रारम्भ कर दिया है। शासकीय सेवाओं (जैसे सेना) से सेवानिवृत्त होने वाले व्यक्ति श्रेष्ठ सिले वस्त्र पहनते हैं।