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गाणपत्य हिन्दुओं का वह सम्प्रदाय है जो गणपति (गणेश) को सगुण ब्रह्म के रूप में मानता एवं पूजता है।


मंत्र - ॐ गं गणपतये नमः


गणपत्य संप्रदाय के लोग गूढ़ हिंदू संप्रदाय के सदस्य है जो गजानन गणेश[1] को परम देवता मानकर उनकी पूजा करते हैं।

लगभग 10वीं शताबदी में यह संप्रदाय अपने चरम पर था और इसने सभी महत्त्वपूर्ण कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों के प्रारंभ में संतुष्ट किए जाने वाले महत्त्वपूर्ण देवता के रूप में गणेश की स्थापना की। इस संप्रदाय ने गणेश को समर्पित मंदिर बनवाए, जिनमें सबसे बड़ा, तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु) में चट्टानों को काटकर बनाया गया मंदिर उच्चि-पिल्लैयार कोविल है। गणेश की पूजा उनकी मूर्ति के समक्ष ध्यान के द्वारा और बिना ध्यान किए फल-फूल अर्पित करके, दोनों तरीके से की जाती है। इस संप्रदाय के सदस्य माथे पर गोल लाल टीका लगाते हैं और कंधों पर हाथी का सिर और दांत का चिह्न अंकित करवाते हैं।