गाधि, राजा कुशिक के पुत्र तथा विश्वामित्र के पिता। वायुपुराण के अनुसार इनके पिता का नाम कुशाश्व था। इनकी माता पुरुकुत्स की कन्या थीं। एक मत से ये इंद्र से उत्पन्न हुए थे। ये कान्यकुब्ज के राजा थे। इनकी कन्या सत्यवती का विवाह ऋचीक से हुआ था। ऋचीक ऋषि ने अपनी पत्नी सत्यवती को एक बार दो चरु दिए। एक उनके लिए तथा दूसरी उनकी माता के लिए। गाधि की स्री अर्थात् सत्यवती की माता ने यह जानकर कि ऋचीक ने जो चरु अपनी स्री (सत्यवती) के लिए दिया है, वह अवश्य ही अच्छा होगा, उसी को खा लिया, जिसके प्रभाव से इन्हें विश्वामित्र नामक पुत्र हुआ, जिसमें ब्राह्मण और क्षत्रिय दोनों के गुण थे। सत्यवती ने दूसरा चरु खाया, जिससे उन्हें क्षत्रियगुणसंपन्न जमदग्नि हुए।