गोपीचन्द भारतीय लोककथाओं के एक प्रसिद्ध पात्र है। वे प्राचीन काल में रंगपुर (बंगाल) के राजा थे और भर्तृहरि की बहन मैनावती के पुत्र कहे जाते हैं।[1]

इन्होंने अपनी माता से उपदेश पाकर अपना राज्य छोड़ा और वैराग्य लिया था । कहा जाता है कि ये जालन्धर नाथ् के शिष्य हुए और त्यागी होने पर इन्होंने अपनी पत्नी पाटमदेवी से, महल में जाकर भिक्षा माँगी थी । इनके जीवन की घटनाओं के गीत आजकल के जोगी सारंगी पर गाया करते हैं।

इन्हें भी देखें संपादित करें

इटैलिक टेक्स्ट

  1. Maharaj, Saint Rampal Ji (2010). मुक्ति बोध - Mukti Bodh. SATLOK ASHRAM. अभिगमन तिथि 10 दिसम्बर 2021.