चीनी-तिब्बती भाषा-परिवार अथवा चीनी भाषा-परिवार (अंग्रेज़ी: Sino-Tibetan languages) दक्षिण एशिया के कुछ भागों, पूर्वी एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया में बोली जाने वाली ४०० से अधिक भाषाओं का परिवार है। इसे बोलने वालों की मूल संख्या के आधार पर यह हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार के बाद दूसरा सबसे बड़ा भाषा परिवार है। चीनी-तिब्बती भाषा के मुख्य मूल भाषी विभिन्न प्रकार की चीनी भाषा (1.2 बिलियन भाषक), बर्मी (33 मिलियन) और तिब्बती भाषा (8 मिलियन) है। विभिन्न चीनी-तिब्बती भाषायें सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में कुछ छोटे समुदायों द्वारा बोली जाती हैं जिसका प्रलेखन स्पष्ट नहीं है।

चीनी-तिब्बती
भौगोलिक
विस्तार:
पूर्वी एशिया , दक्षिण पूर्व एशिया, दक्षिण एशिया
भाषा श्रेणीकरण: विश्व के प्राथमिक भाषा-परिवारों में से एक
उपश्रेणियाँ:
४० के लगभग स्थापित निम्न-स्तर के समूह, जिनमें से कुछ बिलकुल भी चीनी-तिब्बती भाषा परिवार से नहीं हैं।
विभिन्न प्रस्तावित उच्च-स्तर के समूह
पारंपरिक विभाजन:
चीनी बनाम शेष (तिब्बती-बर्मी)
आइसो ६३९-२६३९-५: sit
Sino-tibetan languages - branches.png
चीनी-तिब्बती की विभिन्न शाखाओं का विस्तार

इतिहाससंपादित करें

चीनी, तिब्बती, बर्मी और अन्य भाषाओं के मध्य औत्पत्तिक सम्बन्ध १९वीं सदी के उत्तरार्द्ध में आरम्भ हुआ और वर्तमान में यह विस्तृत रूप से स्वीकृत है। इसका विकास अन्य भाषा परिवारों जैसे हिन्द यूरोपीय अथवा आग्नेय की तुलना में कम हुआ।[1]


भारत में विस्तारसंपादित करें

भारत में चीनी-तिब्बती भाषा परिवार की भाषाओं का विस्तार नाग भाषाओँ के रूप में पाया जाता है।[2]

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Handel, Zev (2008), "What is Sino-Tibetan? Snapshot of a Field and a Language Family in Flux Archived 16 मार्च 2018 at the वेबैक मशीन.", Language and Linguistics Compass 2 (3): 422–441, doi:10.1111/j.1749-818X.2008.00061.x.
  2. शर्मा, रामविलास. भारत के प्राचीन भाषा परिवार और हिन्दी. मूल से 18 जून 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 18 जून 2015.

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें