चेदि (अंग्रेज़ी: Chedi) आर्यों का एक अति प्राचीन वंश है। ऋग्वेद की एक दानस्तुति में इनके एक अत्यंत शक्तिशाली नरेश 'कशु' का उल्लेख है। ऋग्वेदकाल में ये संभवत: यमुना और विंध्य के बीच बसे हुए थे। चेदी यादव प्रारंभिक वैदिक काल में चेदी क्षत्रियों में सबसे प्राचीन जनजातियों में से एक था। ऋग्वेद के काल में ही चेदि राजाओं ने यज्ञों में अपने उदार उपहारों से बड़ी ख्याति अर्जित कर ली थी। ईश्वरसेन उर्फ ​​महाक्षत्रप ईश्वरदत्त आभीर वंश के संस्थापक थे जिन्होंने दक्कन में एक बड़े क्षेत्र पर शासन किया था, उन्होंने एक युग शुरू किया जिसे कलचुरी-चेदी के नाम से जाना गया।[1][2][3]

पुराणों में वर्णित प्राचीन भारत के राज्य

पुराणों में वर्णित परंपरागत इतिहास के अनुसार यादवों के नरेश विदर्भ के तीन पुत्रों में से द्वितीय कैशिक चेदि का राजा हुआ और उसने चेदि शाखा का स्थापना की। चेदि राज्य आधुनिक बुंदेलखंड में स्थित रहा होगा और यमुना के दक्षिण में चंबल और केन नदियों के बीच में फैला रहा होगा। कुरु के सबसे छोटे पुत्र सुधन्वन्‌ के चौथे अनुवर्ती शासक वसु ने यादवों से चेदि जीतकर एक नए राजवंश की स्थापना की। उसके पाँच में से चौथे (प्रत्यग्रह) को चेदि का राज्य मिला। महाभारत मे शिशुपाल चेदि का राजा था। महाभारत के युद्ध में चेदि पांडवों के पक्ष में लड़े थे। छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 16 महाजनपदों की तालिका में चेति अथवा चेदि का भी नाम आता है। चेदि लोगों के दो स्थानों पर बसने के प्रमाण मिलते हैं - नेपाल और बुंदेलखंड में। इनमें से दूसरा इतिहास अधिक प्रसिद्ध हुआ। मुद्राराक्षस में मलयकेतु की सेना में खश, मगध, यवन, शक, हूण के साथ चेदि लोगों का भी नाम है।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

  1. Yadav, J. N. Singh (1992). Yadavas Through the Ages, from Ancient Period to Date (अंग्रेज़ी में). Sharada Publishing House. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-85616-03-2.
  2. Thosar, H.S. (1990). "The Abhiras in Indian History". Proceedings of the Indian History Congress. 51: 56–65. आइ॰एस॰एस॰एन॰ 2249-1937.
  3. Sharma, Arun Kumar (2004). Heritage of Tansa Valley (अंग्रेज़ी में). Bharatiya Kala Prakashan. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-8090-029-7.