किसी प्रकाशीय स्रोत के सामने एक अपारदर्शक वस्तु रखने पर प्रकाश की किरणें वस्तु को पार नहीं कर पाती हैं जिससे वस्तु के पीछे एक अन्धकार भाग दिखाई पड़ता है जिसे छाया कहते हैं।

छाया मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है।

(१)- प्रतिछाया:- ' कोई ओपेक वस्तु प्रकाश के बिंदु स्रोत के सामने रखी जाती है तो उस बिंदु स्रोत (जैसे-टॉर्च) से निकलने वाली प्रकाश किरणे उस वस्तु के पार नहीं जा पाती है और वस्तु के पीछे एक ब्लैक स्पॉट बनता है जिसे प्रतिछया कहा जाता है।'

(२)- उपछाया:- ' कोई ओपेक वस्तु प्रकाश के विस्तारित स्रोत(जैसे-बल्ब,सूर्य इत्यादि) के समाने रखी जाती है तो उस स्रोत से निकली प्रकाश किरणे वस्तु को पार ना करते हुए वस्तु के पीछे घरा काला क्ष्रेत्र निर्मित करती है जो उपछया कहलाती है।'