महाराणा जगतसिंहजी द्वितीय की पटरानी सोलंकीनीजी मान कँवरजी लुनावाड़ा (गुजरात) से उनके उत्तराधिकारी और जेष्ठ पुत्र महाराणा प्रताप सिंहजी द्वितीय का जन्म हुआ। उनकी एक दूसरी रानी झालीजी अमर कँवरजी लाखतर (गुजरात) से उनके दूसरे पुत्र महाराणा अरी (अड़सी) सिंहजी द्वितीय का जन्म हुआ तथा तीन पुत्रियां भी हुई परंतु उनकी माताएं अलग थी बड़ी पुत्री बाईजी लाल रतन कँवरजी जिनका विवाह जोधपुर-मारवाड़ के महाराजा विजय सिंहजी के साथ हुआ,बाईजी लाल अमृत कँवरजी जिनका विवाह छड़ावाड़ (मालवा) के राव अभय सिंहजी के साथ हुआ और अंतिम पुत्री बाईजी लाल सूरज कँवरजी हुई जिनका विवाह संबंध ज्ञात नहीं है।

मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश के शासक
(1326–1948 ईस्वी)
राणा हम्मीर सिंह (1326–1364)
राणा क्षेत्र सिंह (1364–1382)
राणा लखा (1382–1421)
राणा मोकल (1421–1433)
राणा कुम्भ (1433–1468)
उदयसिंह प्रथम (1468–1473)
राणा रायमल (1473–1508)
राणा सांगा (1508–1527)
रतन सिंह द्वितीय (1528–1531)
राणा विक्रमादित्य सिंह (1531–1536)
बनवीर सिंह (1536–1540)
उदयसिंह द्वितीय (1540–1572)
महाराणा प्रताप (1572–1597)
अमर सिंह प्रथम (1597–1620)
करण सिंह द्वितीय (1620–1628)
जगत सिंह प्रथम (1628–1652)
राज सिंह प्रथम (1652–1680)
जय सिंह (1680–1698)
अमर सिंह द्वितीय (1698–1710)
संग्राम सिंह द्वितीय (1710–1734)
जगत सिंह द्वितीय (1734–1751)
प्रताप सिंह द्वितीय (1751–1754)
राज सिंह द्वितीय (1754–1762)
अरी सिंह द्वितीय (1762–1772)
हम्मीर सिंह द्वितीय (1772–1778)
भीम सिंह (1778–1828)
जवान सिंह (1828–1838)
सरदार सिंह (1838–1842)
स्वरूप सिंह (1842–1861)
शम्भू सिंह (1861–1874)
उदयपुर के सज्जन सिंह (1874–1884)
फतेह सिंह (1884–1930)
भूपाल सिंह (1930–1948)
अज़ादी के बाद शासक (महाराणा)
भूपाल सिंह (1948–1955)
भागवत सिंह (1955–1984)
महेन्द्र सिंह (1984–वर्तमान)

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Pichola jheel ke pas jagnivash mehal bnbaya Darbari kavi nekram ne jagvilash granth likha Iske samy maratho ne sarpretham mevad se choth vasula