ज़्यूस देवता की प्रतिमा, जो ओलिपिया, ग्रीस में स्थित है।

ज़्यूस (अंग्रेज़ी: Zeus, यूनानी : ज़ेउस - Ζεύς , दीअस - Δίας) प्राचीन यूनानी धर्म (ग्रीक धर्म) के सर्वोच्च देवता थे। वो सभी देवताओं के राजा थे। भाषाविद् मानते हैं कि ज़्यूस का नाम आदिम-हिन्द-यूरोपीय (आदिम आर्य) लोगों के प्रमुख देवता द्येउस के नाम का रूपन्तरण है -- जो देवता द्यौस् के नाम से ऋग्वेद में सभी देवताओं के पिता माने गये हैं। देवराज ज़्यूस की पत्नी हीरा थीं। ज़्यूस बादल, कड़कती बिजली और वज्र के देवता थे। वो इन्द्र की तरह वज्र लियी रहते थे। उनके लिये प्राचीन यूनान (ग्रीस) में कई ख़ूबसूरत मंदिर थे, जहाँ उनके नाम पर पशुबलि चढ़ाई जाती थे। प्राचीन रोमन धर्म में उनके समतुल्य देवता थे जुपिटर जिन्हें प्राचीन संस्कृत साहित्य में वृहस्पति देवताओं के गुरु कहा गया है, समान प्रतीत होते हैं।

इन सभी तथ्यों के विश्लेषण से यह तो स्पष्ट हो जाता है कि (ज्यूस) जो कि युनान में और भारतीय सनातन धर्म में देवराज इन्द्र आदि नामों से जाने जाते है जो कि इस तरफ इशारा करते है कि इन सभी मान्यताओं का आपस में संबंध है! प्राचीन काल में जब परग्रही पृथ्वी पर आए थे तो मनुष्यो ने विश्व के विभिन्न भागों में उन्हें अलग अलग नामों से जाना था और उनको देवता(जिनके पास दिव्य शक्तियां हो) के रूप में स्वीकार किया क्योंकि उस काल में मनुष्य ने इतनी प्रगति नहीं की थी कि वह समझ पाते की उन लोगों के पास (परग्रही) हमसे उन्नत तकनीकी थी और उन लोगों की सभ्यता हमसे भी कई ज्यादा उन्नत थी। अतः यही एक कारण था कि विश्व के बहुत से प्राचीन सभ्यताओं में एक समान विशेषता वाले देवताओं का जिक्र हुआ है और उनके चित्रों में और ग्रंथों में इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं प्राचीन काल से परग्रही पृथ्वी पर आते रहे हैं।