जूनागढ़ दुर्ग, राजस्थान के बीकानेर में स्थित है। मूलतः इसका नाम चिन्तामणि था। यह राजस्थान के उन मुख्य दुर्गों में से एक है जो पहाड़ी पर नहीं बने हैं।[1][2][3]

जूनागढ़ दुर्ग
बीकानेर, भारत
Bikaner fort view 08.jpg
जूनागढ़ दुर्ग का सामने से दृष्य
Junagarh Fort Anup Mahal.jpg
View of the Private Audience Hall in Anup Mahal
जूनागढ़ दुर्ग की राजस्थान के मानचित्र पर अवस्थिति
जूनागढ़ दुर्ग
जूनागढ़ दुर्ग
जूनागढ़ दुर्ग की भारत के मानचित्र पर अवस्थिति
जूनागढ़ दुर्ग
जूनागढ़ दुर्ग
निर्देशांक28°01′N 73°19′E / 28.02°N 73.32°E / 28.02; 73.32
प्रकारभारत के दुर्ग।दुर्ग
निर्माण जानकारी
नियंत्रकराजस्तान सरकार
जनता हेतु
खुला
Yes
इतिहास
निर्मित1589-1594
निर्माणकर्ताकरन चन्द (बीकानेर के राजा राय सिंह के अधीन)
सामग्रीRed sandstones (Dulmera) and
marbles (including Carrara)

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Michell p. 222
  2. Ring pp. 129-33
  3. "History". National Informatics centre, Bikaner district. मूल से 2009-12-12 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2009-12-07.

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें

Commendation

In the glorious history of India, the era of Rashtrakutas is very grand.  His descendant Rao Sihaji had established the Marwad kingdom.  Two centuries later, under his own lineage, Raojodhaji established the kingdom of Jodhpur.  His courageous eldest son Rao Bikaji wrote the Samvat 1545 AD on this desert.  Vaishakh Shukla Dwitiya founded Bikaner on Saturday.

  Samvat 1522 AD for the establishment of a new state. On his departure from Jodhpur to Vijaya Dashmi, Rao Bikaji was accompanied by his uncle Kandhal, Rupa, Mandana, Mandla Nathubhai Joga, Beeda, Padihar Bela, Napasankhala, Vedalala, Lakhnasi Vaid, Chautham Kothari, Bachhawatbarsingh, Saloji Rathi, Peerot Bikamsey Vyas Kika , Virpal Hatila, there were 100 horsemen and 500 foot soldiers. On reaching Deshnok, he received the blessings and guidance of Maa Karanika in establishing the kingdom, as a result of which Rao Bikaji initially defeated Chandasar and the small Bhupathis around him and took possession of their territory. Later, she married Rangkunwar, the daughter of Rao Sheikha of Pugal, and strengthened her relations with him. The chiefs of the Godars, Pandu and the Gentile rulers also came with Rao Bikaji and supported him. Gradually the kingdom expanded and Rao Bikaji defeated the Subedar Sarang Khan of Hisar in battle, got his brother Bida back in Dronpur and Chhapar and avenged the death of uncle Kandhal by killing Sarang Khan. Gradually, he also merged the areas of Khandela and Rewari in his kingdom. Meanwhile, Rao Bikaji defeated the commander of the Delhi Sultanate, Hindal, and threw him to death.

In this way the area of ​​Bikaner state spread to 40, 000 square miles.  Its border spread from Bhatner in the north to Nagaur in the south and from Fatehpur in the east to Pugal in the west.  As a result, the West and Bikaner emerged as a strong and strong center for the nation's border security.  -
  • 🌳बीकानेर प्रशस्ति🦚*
  • भारत के गौरवशाली इतिहास में राष्ट्रकूटों का युग वडा वैभव पूर्ण रहा है उन्हीं के वंशज राव सीहा जी ने मारवाड़ राज्यों की नीवं डाली थी दो शताब्दी पश्चात उनके वंशज में राव जोधा जी ने जोधपुर राज्य की स्थापना की उनके उनके जेष्ठ पुत्र राव बीकाजी ने मरुधरा पर सावंत 1545 वी वैशाख शुक्ला द्वितीया शनिवार बीकानेर की स्थापना की*
*नवीन राज्य की स्थापना हेतु समझ 1522 की विजयदशमी को जोधपुर से प्रस्थान करते समय राव बीका जी के साथ उनके चाचा कांधल रूपा मांडण, मंडला, नत्थू भाई ,जोगा पड़िहार, बेला, नापा साँखला,बैद लाला ,लखणसी वेद, चौथमल कोठारी , बच्छावत बरसिंह  सलोजी राठी, पिरोत बिक़मसी, व्यास, कीकोजी, वीरपाल हाटीला ,100 घुड़सवार, 500 पैदल सैनिक थे ।*
*देशनोक पहुंचने पर उन्हें राज्य की स्थापना करने में मां करणी का आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ जिसके फलस्वरूप प्रारंभ में राव बीकाजी ने चांडासर और उसके आसपास के छोटे-छोटे भूपतियोको पराजित कर उनके क्षेत्र अपने अधिकार में कर लिए तत्पश्चात पुगल के राव शेखा की पुत्री रंग कुँवर से विवाह कर उनसे अपने संबंधों को दृढ किया ।गोदारा के मुखिया पांडु और अन्य जाट शासक भी राव बीकाजी के साथ आ गये और उन्हें अपना सहयोग दिया धीरे धीरे राज्य का विस्तार हुआ और  राव बीकाजी ने हिसार के सूबेदार सांगर खाँन को युद्ध में प्राप्त कर अपने भाई बीदा को द्रोणपुर और छाप्पर वापिस दिलवाए तथा सांगर खाँ  को  मार कर चाचा कांधल की मौत का बदला लिया धीरे धीरे खंडेला और रेवाड़ी के क्षेत्र भी उन्होंने अपने राज्य में मिला लिऐ। इसी बीच राव बीकाजी ने दिल्ली  सल्तनत सेनापति हिन्दाल को परास्त कर मौत के घाट उतार दिया*
  • इस तरह बीकानेर राज्य का क्षेत्रफल 40000 वर्ग मील तक फैल गया उत्तर मैं इसकी सीमा भटनेर से लेकर दक्षिण में नागौर तक तथा पूर्व में फतेहपुर से लेकर पश्चिम में पूगल तक फैल गई परिणाम यह हुआ की राष्ट्र की सीमा सुरक्षा के लिए पश्चिम की ओर बीकानेर एक सबल और सशक्त केंद्र के रूप में उभरा।*
  1. राव बीका जी की मूर्ति शिलालेख से जूनागढ़ बीकानेर #