ट्राइकोप्टेरा

कीड़ों के प्रकार

'ट्राइकोप्टेरा (Trichoptera) या लोमपक्ष, कीटों का एक गण है, जिसमें रोम से आवृत शरीर और पंखवाले मँझोले कद के कीट सम्मिलित हैं। रोम की उपस्थिति इनको तितलियों से अलग करती है। इनमें चिबुकास्थि (mandible) नहीं होती, या लुप्तावशेष अवस्था में रहती है। जंबुक (maxillary) और लेबियल स्पर्शक (labial palpies) भली भाँति विकसित अवस्था में रहते हैं। आड़ी शिराओं से युक्त दो जोड़े झिल्लीमय पंख होते हैं, जो विश्राम की स्थिति में छतनुमा लगते हैं। एरूसिफाँर्म (Eruciform) लार्वे जलीय हैं और प्राय: पत्रों, काठ के टुकड़ों, रेत या कंकड़ से बने खोल में रहते हैं। इनका विशिष्ट लक्षणा यह है कि पिछले उदरीय खंड पर स्थिति दो सांकुश पूर्वपादों की सहायता से खोल से संबद्ध रहते हैं। ये इन पादों का उपयोग चारा पकड़ने में भी बहुत करते हैं।

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ये पानी में या पानी के निकट अंडे देते हैं। लार्वा शीघ्र ही बाह्य पदार्थ से अपने को ढँककर एक नली बन जाता है जिसके छोर पर उसका सिर निकला रहता है। यह उदर पर स्थित श्वासनलिका (Tracheal) क्लोम से साँस लेता है। शरीर की लहरदार गति के कारण खोल जलधारा में बहता है। लार्वा शाकभक्षी या मांसभक्षी दोनों हो सकता है। खोल के खुले भाग के सिल्क के ढँक जाने पर प्यूपीकरण प्राय: खोल के अंदर ही होता है। प्यूपा बड़ी चिबुकास्थि की सहायता से खेल से मुक्त होकर प्रौढ़ अवस्था में बाहर आता है। मुक्त प्यूपा उरोमध्य (mesothoracic) पाद से तैरकर तट पर आता है और कुछ ही समय बाद प्रोढ़ कीट बन जाता है।

इस गण के प्रमुख सदस्य मई मक्खियाँ (Caddis flies), फ्रजेनिया (phrygania), लिम्नोफिलस (Limnophilus), और राइऐकोफिला (Rhyacophila) हैं।


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