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तज़किरा (फ़ारसी: تذکره‎‎) भारतीय उपमहाद्वीप, ईरान और मध्य एशिया की बहुत-सी भाषाओँ में (जैसे कि उर्दू, फ़ारसी, उज़बेकी, पंजाबी) के साहित्य में किसी लेखक कि जीवनी को दर्शाने वाले उसकी कृतियों के एक संग्रह (यानि कुसुमावली) को कहते हैं। तज़किरे अधिकतर कवियों-शायरों के बनाए जाते हैं, हालांकि गद्य-लेखक का भी तज़किरा बनाना संभव है। कभी-कभी किसी व्यक्ति कि जीवनी या जीवन-सम्बन्धी कहानियों को भी 'तज़किरा' कह दिया जाता है।[1] वैसे तो महत्वपूर्ण शायरों और अन्य व्यक्तियों पर हज़ारों तज़किरे लिखे जा चुके हैं लेकिन समीक्षकों ने आलोचना की है कि इनमें से बहुत से ऊट-पटांग ढंग से भी लिखे गए हैं जिनमें बिना तथ्य की अफ़वाहें शामिल हैं और कभी-कभी किसी और शायर के शेर ग़लती से शामिल कर लिए गए हैं।[2]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. The making of Indo-Persian culture: Indian and French studies, Muzaffar Alam, Françoise Delvoye Nalini, Marc Gaborieau, Manohar Publishers & Distributors, 2000, ISBN 978-81-7304-210-2, ... Persian historical writings (tarikhs and tazkiras) are another important component of the Indo-Persian literary tradition. The contribution of Indians, Iranian and Central Asian immigrants in this realm is enormous by any standard ...
  2. Beyond Turk and Hindu: rethinking religious identities in Islamicate South Asia, David Gilmartin, Bruce B. Lawrence, University Press of Florida, 2000, ISBN 978-0-8130-1781-5, ... Pritchett observes, 'The critical attitudes and vocabulary used by the tazkiras are all but unintelligible to most scholars—and in fact arouse considerable disdain.' ...