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तत्त्ववैशारदी योग से सम्बन्धित एक संस्कृत ग्रन्थ है। यह वाचस्पतिमिश्र की कृति है जो व्यास भाष्य पर की टीका है। तत्त्ववैशारदी को सुस्पष्ट करने के लिये इस पर भी टीका मिलता है जिसका नाम पातंजलरहस्य है तथा इसके रचयिता राघवानन्द सरस्वती हैं।[1]

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