त्रिपिटकों में "तथागत" शब्द का उपयोग गौतम बुद्ध ने स्वयं के लिए किया है। इस शब्द का अर्थ है :- तथा+गत = '(वह जो) जैसा आया था, वैसा ही चला गया'।