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तमांग रिपोर्ट, मैट्रोपोलिटन मजिस्‍ट्रेट एस पी तमांग द्वारा बनाई गई रिपोर्ट हैं। इस रिपोर्ट में गुजरात पुलिस पर आरोप लगाए गए थे कि पुलिस ने जून 2004 में कालेज छात्रा इशरत जहां और उसके तीन दोस्‍तों जावेद गुलाम उर्फ प्रनेश कुमार पिल्‍ले, अमजद अली उर्फ राजकुमार अली राणा और जीशान जौहर, अब्‍दुल गनी को फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया था[1]। इस रिपोर्ट पर गुजरात उच्च न्यायालय ने ९ सितंबर, २००९ को रोक लगा दी।

विवरणसंपादित करें

तमांग रिपोर्ट के अनुसार फर्जी मुठभेड़ में गुजरात के तीन आई पी कैडर के लोग शामिल हैं। जिसमें तत्‍कालीन पुलिस कमिश्‍नर के आर कौशिक सहित पुलिस महकमें के ड्राइवर, कांस्‍टेबल समेत 28 लोग शामिल हैं। इशरत जहां की फर्जी मुठभेड़ में शामिल अतिरिक्‍त पुलिस आयुक्‍त डी.जी.वणजारा और ए.सी.पी डॉ॰ एन के अमीन सौहराबुद्दीन के फर्जी मुठभेड़ के मामले में राज्‍य की साबरमती जेल में सजा भोग रहे हैं[1]

प्रभावसंपादित करें

समयसारिणीसंपादित करें

रिपोर्ट के खिलाफ गुजरात राज्य सरकार की दलीलेंसंपादित करें

गुजरात सरकार के प्रवक्ता जयनारायण व्यास ने कहा कि मजिस्ट्रेट तमांग की रिपोर्ट कानून के हिसाब से खराब है और उन्होंने उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त उच्च स्तरीय समिति के निष्कर्ष निकालने से पहले रिपोर्ट पेश कर अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है[2]

सन्दर्भसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें