बिहार की राजधानी पटना से करीब पैंतीस किलोमीटर दूर तारेगना एक छोटा सा क़स्बा है, जो आर्यभट्ट की कर्मस्थली मानी जाती है। यही रहकर आर्यभट्ट ने आकाश में ग्रह-नक्षत्र और तारों की स्थिति का अध्ययन किया था और इसलिए इसका नाम तारेगना पड़ गया।

तारेगना
तरे'गना
क़स्बा
देशFlag of India.svg भारत
राज्यबिहार
जिलापटना
ऊँचाई61 मी (200 फीट)
जनसंख्या (2011)
 • कुल940
भाषा
 • Officialमगही, हिन्दी
समय मण्डलIST (यूटीसी+5:30)
पिन804452
टेलीफोन कोड0612

तारेगना एकाएक वर्ष 2009 के जुलाई महीने में उस समय चर्चा में आया, जब अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान नासा ने तारेगना पर एक रिपोर्ट छापी. इस रिपोर्ट में कहा गया कि तारेगना से 22 जुलाई का खग्रास यानी पूर्ण सूर्यग्रहण के बखूबी देखा जा सकेगा. इस रिपोर्ट के बाद दुनियाभर से खगोल वैज्ञानिक और पर्यटक तारेगना पधारे, लेकिन आकाश में बादल छाए रहने के कारण वो यहां पूर्ण सूर्यग्रहण का नजारा नहीं देख सके और उन्हें निराशा हाथ लगी.

इतिहाससंपादित करें

भूगोलसंपादित करें