त्रिपुर (शाब्दिक अर्थ : तीन नगर) का निर्माण महान असुर वास्तुकार मय ने किया था। ये तीन पुर समृद्धि, शक्ति और सत्ता के केन्द्र थे। इन अपवित्र पुरों को शिव ने नष्ट किया जिससे उन्हें त्रिपुरान्तक कहा जाता है। ये तीन नगर लोहे, चाँदी तथा स्वर्ण से निर्मित थे और क्रमशः स्वर्ग, पृथ्वी एवं पाताल में स्थित थे।

यहां, पांच सिर वाले त्रिपुरान्तक को मेरु पर्वत के बने धनुष से त्रिपुरासुर (सबसे ऊपरी दाहिने कोने में) की ओर एक तीर से लक्ष्य करते हुए दर्शाया गया है। इसमें धनुष की डोरी के रूप में वासुकी नाग हैं। चतुर्मुख ब्रह्मा भी यहाँ चित्रित हैं। चन्द्रमा और सूर्य को रथ के पहियों के रूप में दर्शाया गया है।

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इन्हें भी देखेंसंपादित करें