त्रिमोहिनी संगम- यहाँ तीन नदियों का संगम है जिसमे प्रमुख रूप से गंगा और कोशी का मिलन है। त्रिमोहिनी संगम भारत की सबसे बड़ी उत्तरायण गंगा का संगम है। गंगा नदी दक्षिण से उत्तर दिशा में प्रवाहित होती है। सूर्योदय से ही उत्तर दिशा में प्रवाहित होती है। सूर्योदय की किरणें सीधे गंगा के लहरों पर पड़ती है। जिससे प्रकृति का अनुपम दृश्य उपस्थित हो जाता है। नेपाल से निकलने वाली कोसी के सप्तधाराओं में एक सीमांचल क्षेत्र के कई जिलों से गुजरते हुए यहां आकर गंगा नदी से संगम कर अपना वजूद खो देती है। कलबलिया नदी की एक छोटी धारा की उत्पत्ति इस उत्तरवाहिनी गंगा तट से हुई है। गंगा नदी पार दूसरे छोड़ पहाड़ों के बीच बाबा बटेशवरनाथ का प्रसिद्ध पौराणिक मंदिर है।

त्रिमोहिनी संगम पर बन रहा पर्यटकों के लिए पर्यटन स्थल।

प्रमुख आकर्षणसंपादित करें

प्रकृति की अनुपम दृश्य देखने को मिलता है।आज तक त्रिमोहिनी संगम तट पर किसी की भी डूबने से मृत्यु नही हुई है।यहाँ इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त है,मोक्षदायिनी है माँ गंगा का त्रिमोहिनी संगम। धार्मिक रूप से उत्तरवाहनि गंगा तट का यह क्षेत्र उपकाशी समझा जाता है। संगम बाबा कहते हैं कि सवा हाथ धरती के कम पड़ने से यह क्षेत्र काशी नहीं बन सका। पुण्य भूमि काशी की सारी धार्मिक स्थितियां यहां विद्यमान है। बाबा ने खुद का जीवन गंगा मैया के नाम समर्पण कर इस स्थल के समीप राणेश्वर कामना लिंग स्थापना के लिए मंदिर का निर्माण प्रारंभ कर दिया है। मंदिर निर्माण कार्य प्रगति पर है। इस तट के ख्याति के लिए संगम बाबा अनवरत प्रचार में जुटे हैं। तट के लिए इस क्षेत्र को बाबा द्वारा सुंदर नगरम का नाम दिया गया है।संपादित करें

==माघी पूर्णिमा मेला==संपादित करें

हर वर्ष त्रिमोहिनी संगम पर एक अद्भुत सुंदर मेला माघी पूर्णिमा के शुभ अवसर पर लगता है।बिहार के कई जिलों से तथा नेपाल से भी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ गंगा स्नान के लिए त्रिमोहिनी संगम पर पहुंचती है।संपादित करें

आवागमनसंपादित करें

वायु मार्ग: यहाँ का सबसे निकटतम हवाई अड्डा बागडोगड़ा (सिलीगुड़ी के निकट) हवाई अड्डा है।

रेल मार्ग: कटिहार में रेलवे स्‍टेशन कटिहार रेलमार्ग द्वारा भारत के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। पूर्वोतर के राज्‍यों में आवागमन का प्रमुख रेल मार्ग बरौनी-कटिहार-गौहाटी ही है। और मुख्य पाँच अलग - अलग मार्गाों में ट्रेनों का आवागमन भी यही से होता है।

सड़क मार्ग: भारत के कई प्रमुख शहरों से कटिहार सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। राष्ट्रीय राजमार्ग 31 इस जिले तक पहुंचने का सुलभ राजमार्ग है।और झारखण्ड जाने के लिए मनिहारी गंगा में एल टी सी सेवा उपलब्ध् है,जो गंगा नदी के रास्ते साहिबगंज को जाती है। और मनिहारी में गंगा पुल होने का कार्य भी प्रारम्भ हो चुका है जो जल्दी ही कटिहार-झारखंड मार्ग को अति सुलभ बनाऐगी। बिहार के कटिहार जिले के अंतर्गत कुर्सेला प्रखंड के कटरिया गांव के NH-31 से रास्ता त्रिमोहिनी संगम की ओर जाती है।

ऐतेहासिक महत्वसंपादित करें

स्थल का ऐतिहासिक महत्व है, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के मृत्यु के उपरांत उनके अस्थी भस्म को देश के अन्य संगम तटों के साथ इस त्रिमोहनी संगम तट पर 12 फरवरी को विसर्जित किया गया था। जिसकी स्मृति में इस तिथि पर यहां भव्य कृषि मेला लगा करता था। तट के महत्त के वजह से इस स्थान पर पूज्य बापू के अस्थी को प्रवाहित किया गया था। धार्मिक अस्थाओं के साथ यह स्थल का ऐतिहासिक रूप से पहचान कायम है।