थाईलैंड में सिख धर्म

सिख धर्म थाईलैंड में लगभग 70,000 अनुयायियों के साथ एक मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक धर्म है। धर्म भारत से प्रवासियों द्वारा लाया गया था जो 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में पहुंचने लगे। बैंकाक में गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा सहित देश में लगभग बीस सिख मंदिर या गुरुद्वारे हैं।

संख्या और स्थितिसंपादित करें

2006 में सिख समुदाय का आंकलन किया था जिसके अनुसार उस समय लगभग 70,000 लोग शामिल थे, जिनमें से अधिकतर बैंकॉक, चियांग माई, नाखोन रत्थासिमा, पट्टाया और फुकेत में रहते थे। आंकलन के समय देश में उन्नीस सिख मंदिर थे। सिख धर्म संस्कृति मंत्रालय के धार्मिक मामलों विभाग के साथ पंजीकृत पांच धार्मिक समूहों में से एक था[1]|

पहचानसंपादित करें

बैंकाक के सिख निवासियों के एक अध्ययन में पाया गया कि "थाई-सिख पहचान बैंकाक समाज में स्पष्ट और अच्छी तरह से रखी गई है", लेकिन पश्चिमी और अन्य समाजों के प्रभाव पारंपरिक जीवनशैली सुविधाओं की उपेक्षा कर रहे थे[2]। बैंकाक में सिख समुदाय को "थाईलैंड में सबसे एकीकृत समुदाय" के रूप में वर्णित किया गया है[3]|

इतिहाससंपादित करें

बैंकाकसंपादित करें

थाईलैंड पहुँचने वाले पहले भारतीयों में 1884 में किरपरम मदन था। वह सियालकोट जिले के भडवाल गांव (अब पाकिस्तान में) के सहजधारी सिख थे[4] । उन्हें थाईलैंड के राजा राम वी के दर्शन का अवसर प्राप्त हुआ था[5] । वह अपने रिश्तेदारों को लाया जिनके उपनाम मदन, नरुला और चावला थे। वे थाईलैंड में अप्रवासी भारतियों के पहले सदस्यों में से थे, जिन्होंने 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में पहुंचना शुरू किया था[6]|

चियांग माईसंपादित करें

चियांग माई यात्रा करने वाला पहला सिख व्यक्ति ईशर सिंह था, जिसने वर्ष 1905 में भारत से बर्मा के माध्यम से थाईलैंड में यात्रा की थी (या बौद्ध पंचांग के अनुसार वर्ष 2448)। इसके तुरंत बाद थाईलैंड में लगभग चार और परिवार आए। वे रतन सिंह, जियान सिंह, वारियाम सिंह और अमांडा सिंह थे। 1907 में, सिखों के इस समूह ने चेरोनार रोड में एक गुरुद्वारा स्थापित करने का फैसला किया, जो अभी भी वही स्थान पर खड़ा है और अब 240 वर्ग मीटर की जगह पर है।

पटायासंपादित करें

1975 में पट्टाया में केवल तीन या चार सिख परिवार थे। लेकिन पट्टाया एक पर्यटक रिसॉर्ट बनने के बाद, कई सिख उबोल रत्थानी, उडन रत्थानी, नाकोर्न रत्ससिमा (कोरत) और सट्टाहिप जैसे अन्य प्रांतों से वहाँ चले गए।

थाईलैंड में गुरुद्वारेसंपादित करें

थाईलैंड में सिखों ने पूरे देश में कई गुरुद्वारों का निर्माण किया है। वर्तमान में निम्नलिखित प्रांतों में गुरुद्वारे स्थित हैं:

  • बैंकॉक, फ्रा नाखोन
  • चियांग माई, मुआंग जिला
  • चियांग राय, मुआंग जिला
  • चोनबरी, पट्टाया
  • चोनबरी, पट्टाया
  • खनन काएन, मुआंग जिला
  • लैंपांग, मुआंग जिला
  • नखोन फैनॉम, मुआंग जिला
  • नखोन रत्थासिमा, मुआंग जिला

सन्दर्भसंपादित करें

  1. International Religious Freedom Report 2006 Archived 2018-07-09 at the Wayback Machine, U.S. Department of State
  2. Nakrob Narksuwan, Wisanee Siltragool & Anchalee Jantapo, "Current Conditions and Problems of Conservation and Inheritance of Identity Among Thai-Sikhs", Asian Culture and History; Vol. 7, No. 1; 2015, ISSN 1916-9655 E-ISSN 1916-9663. Published by Canadian Center of Science and Education.
  3. Rajwant Singh Chilana (16 January 2006). International Bibliography of Sikh Studies. Springer Science & Business Media. पृ॰ 466. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-1-4020-3044-4. मूल से 25 जून 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 नवंबर 2018.
  4. Surendra K. Gupta (1999). Indians in Thailand. Books India International. पृ॰ 48.
  5. The records are available in the Gurudwara Singh Sabha in Bangkok.
  6. Surendra K. Gupta (1999). Indians in Thailand. Books India International. पृ॰ 67.