दीर्घतपा सन् १९६४ में प्रकाशित फणीश्वर नाथ रेणु का उपन्यास है। इसकी कथावस्तु बिहार की राजधानी पटना के एक वर्किंग वीमेंस हॉस्टल के आस-पास बुनी गई है। गोपाल राय के अनुसार-"इस उपन्यास में इन छात्रावासों के अन्दर पनपने वाले भ्रष्टाचार, स्त्रियों के काम-शोषण आदि का अंकन हुआ है।"[1]

संदर्भसंपादित करें

  1. गोपाल, राय (२०१४). हिन्दी उपन्यास का इतिहास. नई दिल्ली: राजकमल प्रकाशन. पृ॰ २५१.