धौलागढ़ की देवी का मंदिर अलवर जिले की कठूमर तहसील के बहतु कलान ग्राम में है।

धौलागढ़ की देवी के बारे में जानकारी मिलती है की वो धौला (धोलिया/धौल्या) गौत्र के नागवंशी जाट शासक की पुत्री थी। यह देवी की परम भक्त थी। लोकदेवता वीर तेजाजी का जन्म भी इसी धौला (धोलिया/धौल्या) नागवंशी जाट वंश में हुआ था। इस मंदिर का निर्माण नवी सदी में धोलपुर के धौल्या नागवंशी शासक ने करवाया था। यह अरावली पर्वत श्रृंखला की चोटी पर स्थित है। यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 101 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। तीन सौ से साढ़े तीन सौ साल पहले भरतपुर रियासत के अधीन जब यह सम्पूर्ण क्षेत्र था उस समय इसका पुनः निर्माण महाराजा सूरजमल ने करवाया था। यहां वैशाख पंचमी से सात दिवसीय मेला भरता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन कर मन्नत मांगते है।