नरेश बेदी
नरेश बेदी एक भारतीय फ़िल्म निर्माता है, जो वन्य-जीवन से संबंधित फिल्म निर्माण के लिए जाने जाते हैं। उन्हें वृत्तचित्र, एनिमेशन और लघुफिल्मों के लिए आयोजित मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव-2016, (एम.आई.एफ.एफ-2016) के उद्घाटन समारोह में वी शांताराम लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्रदान किया गया। उन्हें उनके प्रकृति तथा वन्य जीवन पर फिल्मांकन के लिए इससे पूर्व वाइल्ड स्क्रीन अवार्ड, पृथ्वी रत्न पुरस्कार, द ह्वेल अवार्ड जैसे अनेकों पुरस्कार दिये जा चुके हैं। इनकी एक अन्य फिल्म ‘गंगा घड़ियाल’ ने वाइल्ड स्क्रीन रेड पांडा पुरस्कार, जिसे ग्रीन आस्कर कहा जाता है, जीता है। यह पुरस्कार जीतने वाले वे प्रथम एशियाई हैं। उन्होंने अपने फिल्मों में दुर्लभ वन्य जीव क्षणों को फिल्माया है। इनके फिल्मों को बी.बी.सी. नेशनल ज्योग्राफिक, डिस्कवरी और कैनल प्लस जैसे प्रतिष्ठित चैनलों पर प्रसारित किया गया है। उनका जन्म उत्तराखंड के हरिद्वार में हुआ और वे वहीं पर पले बढ़े। जंगलों तथा जंतुओं के प्राकृतिक आवास का इन्होंने नजदीक से अध्ययन किया है।[1][2]
नरेश बेदी | |
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जन्म | हरिद्वार, उत्तराखंड, भारत |
पेशा | फिल्म निर्माता, फोटोग्राफर |
बच्चे |
अजय बेदी विजय बेदी |
माता-पिता | रमेश वेदी |
पुरस्कार |
पद्म श्री वाइल्डस्क्रीन पांडा पुरस्कार अर्थ वाच अवार्ड संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) पृथ्वी रत्न पुरस्कार ईस्टमैन कोडक पुरस्कार क्लासिक टेली अवार्ड इन्टरनेशनल वाइल्ड लाइफ फिल्म फेस्टिवल अवार्ड व्हेल पुरस्कार वन्यजीव एशिया अवार्ड आदि। |
वेबसाइट बेदी ब्रदर्स वेबसाइट |
सन्दर्भ
संपादित करें- ↑ "Naresh Bedi and his wildlife world" [नरेश बेदी और उसके वन्य जीवन की दुनिया]. पत्र सूचना कार्यालय भारत सरकार (अंग्रेज़ी में). 29 जनवरी 2016. मूल से 10 सितंबर 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 मार्च 2016.
- ↑ "Wild Film History" [वन्य फिल्म इतिहास] (अंग्रेज़ी में). वाइल्ड फिल्म हिस्टरी. 2015. मूल से 18 फ़रवरी 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 मार्च 2016.