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नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान (अंग्रेज़ी: Nepal Academy) भाषा, साहित्य, संस्कृति तथा दर्शन के संरक्षण, सम्वर्द्धन और विकास हेतु नेपाल सरकार द्वारा स्थापित संस्था है। प्रतिष्ठान के कुलपति माननीय गंगाप्रसाद उप्रेती हैं तथा सचिव प्राध्यापक डाक्टर jagat prasad upadhyay प्रेक्षित हैं। माननीय कुलपतिजी के सचिवालय प्रमुख विश्वास घिमिरे हैे। वो कुलपतिजी के समग्र सचिवालय, अन्तर्राष्ट्रिय सम्बन्ध विभाग अौर राष्ट्रिय प्रतिभा उपचार कोषका कार्यो में सक्रियतापूर्वक कार्यकर्ते हें।.k.ref>"History". Nepal Academy.</ref>

स्थापनासंपादित करें

नेपाल में राष्ट्रीय सांस्कृतिक अकादमी के लिए एक आंदोलन 20 वीं सदी के दौरान शुरू हुआ, राष्ट्रीय आंकड़ों के साथ नेपाली कवि लक्ष्मी प्रसाद देवकोटा ने इसकी स्थापना की पहल की।[1] उनकी पहल पर यह प्रतिष्ठान 1957 में अस्तित्व में आया और इसका नाम पड़ा नेपाल साहित्य कला प्रतिष्ठान (एकेडेमी)। यह बाद में रॉयल नेपाल अकादमी अधिनियम 1974 के पारित होने के बाद नेपाल राजकीय प्रज्ञा प्रतिष्ठान (रॉयल नेपाल अकादमी) के रूप में नामित किया गया। 2008 में एक लोकतांत्रिक संघीय गणराज्य में नेपाल के संक्रमण के बाद नेपाल की संसद द्वारा अधिनियमित नेपाल अकादमी अधिनियम 2007 के प्रावधान के अनुसार इसका नाम नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान (नेपाल अकादमी) कर दिया गया।[2]

भाषा, साहित्य, संस्कृति, सामाजिक विज्ञान और दर्शन नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के पाँच महत्वपूर्ण विभाग है।

कार्यसंपादित करें

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान ने 'बृहत नेपाली शब्दकोश' का निर्माण किया है।


छवी दिर्घासंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "103rd birth anniversary of Devkota being marked". reviewnepal.com. 2012-11-12.
  2. "History". Nepal Academy.

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें