सेवा में, महिला आयोग लखनऊ विषय :- महिला उत्पीड़ित सवनिये निवेदन है कि अर्शी पुत्री रसीद पता :- नई बस्ती, गल्ला मंडी के पीछे नानपारा (बहराइच) निवासी है, जिसे रात 13/02/2020 में बहोत बूरी तरीके से मारा गया है,उसकी उम्र 18+है ,क्योंकी लड़की किसी हिन्दू लड़के से प्यार करती है, और उसको मारने के लिए लड़की पे गलत इल्जाम लगा गया है,और उसे मारने की धमकी दी गई कि अगर तुमने लड़के से शादी करने के लिए बोलती हो , यह फिर लड़के की तरफ से बोलती हो ,तो हम तुम्हे और लड़के को जान से खत्म कर देंगे ,और हमरे पास इतना पैसा है,की पुलिस भी हमरा कुछ नहीं कर पाए गई। मारने वाले सक्स माता का नाम - अख्तरी बेगम, बड़े पापा :- कालू ड्राईवर ,और आदि। मेरी आप से विनती है कि पीड़िता को इंसाफ मिले।

भारत में न्यायालय का इतिहाससंपादित करें

भारतीय न्यायालयों की वर्तमान प्रणाली किसी विशेष प्राचीन परंपरा से संबद्ध नहीं है। मुगल काल में दो प्रमुख न्यायालयों का उल्लेख मिलता हैः सदर दीवानी अदालत तथा सदर निजाम-ए-अदालत, जहाँ क्रमशः व्यवहारवाद तथा आपराधिक मामलों की सुनवाई होती थी। सन् 1857 ई. के असफल स्वातंत्र्ययुद्ध के पश्चात् अंग्रेजी न्याय-प्रशासन-प्रणाली के आधार पर विभिन्न न्यायालयों की सृष्टि हुई। इंग्लैंड में स्थित प्रिवी काउंसिल भारत की सर्वोच्च न्यायालय थी। सन् 1947 ई. में देश स्वतंत्र हुआ और तत्पश्चात् भारतीय संविधान के अंतर्गत संपूर्ण-प्रभुत्व संपन्न गणराज्य की स्थापना हुई। उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) भारत का सर्वोच्च न्यायालय बना।

न्यायालयों के भेदसंपादित करें

न्यायालयों को उनके भेदानुसार विभिन्न वर्गों में बाँटा जा सकता है, जैसे उच्च तथा निम्न न्यायालय, अभिलेख न्यायालय तथा वे जो अभिलेख न्यायालय नहीं है, व्यावहारिक, राजस्व तथा दंड न्यायालय, प्रथम न्यायालय तथा अपील न्यायालय और सैनिक तथा अन्यान्य न्यायालय।

उच्चतम न्यायालय देश का सर्वोच्च अभिलेख न्यायालय है। प्रत्येक राज्य में एक अभिलेख न्यायालय है। राज्य के समस्त न्यायालय उसके अधीन हैं। राजस्व परिषद् (बोर्ड ऑव रेवेन्यू) राजस्व संबंधी मामलों को प्रादेशिक सर्वोच्च अभिलेख न्यायालय है। कतिपय मामलों को छोड़कर उपर्युक्त न्यायालयों को अपील संबंधी क्षेत्राधिकार है। जिले में प्रधान न्यायालय जिला न्यायाधीश का है।

अन्य न्यायालय कार्यक्षेत्रानुसार इस प्रकार हैः

(1) व्यावहारिक न्यायालय, जैसे सिविल जज तथा मुंसिफ के न्यायालय और लघुवाद न्यायालय (कोर्ट ऑव स्माल काजे़ज़),

(2) दंड न्यायालय, जैसे जिला दंडाधिकारी (डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट), अन्य दंडाधिकारियों के न्यायालय तथा सत्र न्यायालय (कोर्ट ऑव सेशंस),

(3) राजस्व न्यायालय, जैसे जिलाधीश (कलक्टर) तथा आयुक्त (कमिश्नर) के न्यायालय।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें