परदा (fret) तंतुवाद्यों (तार वाले संगीत वाद्यों) के तनों या अन्य ढांचों पर बनी उन धातु, लकड़ी या प्लास्टिक की उन उभरी लकीरों को कहते हैं जिनपर दबाने से किसी बजाये जाने वाले तार का सुर बदल जाता है। आमतौर से सितार में १३, १६ या १९ परदे रहते हैं और अन्य वाद्यों में भी इनकी अलग-अलग संख्याएँ निर्धारित रहती हैं।[1][2]

एक गिटार के तने की इस तस्वीर में तारों के नीचे धातु के बने चार परदे देखे जा सकते हैं

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. असली तालीम सितार, या, इसरार-ए-हामिद, हामिद हुसैन ख़ान, रामचरण लाल अग्रवाल (प्रकाशक), १९३२, ... सितार में परदों की संख्या १६, १७, १८ तक होती है।..
  2. भारतीय संगीत वाद्य - लोकोदय ग्रंथमाला, लालमणी मिश्र, भारतीय ज्ञानपीठ प्रकाशन, १९७३, ... सोलह परदों के सितारों में निषाद का एक ही परदा होता है।..