परिसीमन आयोग भारत सरकार द्वारा परिसीमन अधिनियम के अन्तर्गत स्थापित आयोग है। इस सम्बन्ध में अधिसूचना भारत के राष्ट्रपति द्वारा जारी की जाती है। [1] वर्ष 1952,1963,1973 और 2002 में परसीमन आयोग गठित किये गये थे।

आयोग के मुख्य कार्यसंपादित करें

  • हाल की जनगणना के आधार पर भारत की सभी लोक सभा और विधान सभा के निर्वाचन क्षेत्रों सीमायें की पुनः निर्धारित करना।
  • सीमाओं के पुनर्निर्धारण में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधित्व को अपरिवर्तित रखना अर्थात प्रतिनधियों की संख्या में कोई परिवर्तन न करना।
  • अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की विधान सभा सीटों का निर्धारण क्षेत्र की जन गणना के अनुसार।

वर्ष 2002 में गठित आयोगसंपादित करें

भारत के उच्चतम न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुलदीप सिंह की अध्यक्षता में १२ जुलाई २००२ को परिसीमन आयोग का गठन किया गया। यह आयोग वर्ष २००१ की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन करेगा। दिसंबर २००७ में इस आयोग ने नये परिसीमन की संसुतिति भारत सरकार को सौंप दी। लेकिन सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। इस पर उच्चतम न्यायलय ने, एक दाखिल की गई रिट याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी की। फलस्वरूप कैविनेट की राजनीतिक समिति ने १० जनवरी २००८ को इस आयोग की संस्तुतियों को लागु करने का निश्चय किया। [2] १९ फरवरी २००८ को राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने इस परिसीमन आयोग को लागू करने की स्वीकृति प्रदान की। [3]

सन्दर्भसंपादित करें

  1. http://www.thehindu.com/todays-paper/article1205516.ece
  2. "संग्रहीत प्रति". मूल से 14 मार्च 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 अक्तूबर 2016.
  3. Delimitation notification comes into effect - The Hindu 20 February 2008

इन्हें भी देखेंसंपादित करें