पान झाओ (Chinese: 班昭 ; 49 – 120 ई.) चीन के इतिहास की प्रारंभिक विशिष्ट महिला इतिहासकार, विदुषी एवं कवयित्री। इनके पिता पन पिआबो हान राजवंश के शाही दरबार के महान् इतिहासज्ञ थे। इनके एक भाई पान कू भी एक प्रसिद्ध इतिहासकार थे और दूसरे भाई पान चाओ प्रख्यात सेनानायक थे जिन्होंने सफलतापूर्वक मध्य एशिया पर चीनी आक्रमण का नेतृत्व किया था। इनका विवाह त्साओ शिह् शु के साथ हुआ था, किन्तु इनके पति का देहावसान अल्प आयु में ही हो गया था। ९२ ई. में जब इनके बड़े भाई की मृत्यु हुई, हान-शु (पूर्ववर्ती हानवंश का इतिहास) अधूरा था। सम्राट् ने उन्हें शाही अभिलेखगार में कार्य चलाते रहने की आज्ञा दी। अतएव इन्होंने आठ तालिकाएँ (पिआवो) पूरी कीं और खगोलविद्या पर निबन्ध (तिएन-वेन-चिह) लिखा : इस प्रकार इन्होंने चीन के प्रारंभिक राजवंशों के इतिहासों में से एक के लेखन का अविस्मरणीय एवं गम्भीर कार्य पूरा किया। सम्राट् ने इनसे रानी तथा महल की अन्य महिलाओं के लिये शिक्षिका के रूप में महल में जाने का निवेदन किया और ये ता-चिआ या ता-कू (महादेवी या ग्रेट लेडी) की उपाधि से सम्मानित की गईं। शाही दरबार के महत्वपूर्ण उत्सवों के लिये इनसे काव्यरचना करने का भी निवेदन किया गया। इसके पश्चात् इन्होंने विधवा रानी तेंग की व्यक्तिगत सलाहकार के रूप में सेवा की।

पान झाओ की विद्वत्ता इतनी उच्च कोटि की थी कि माँ युंग जैसे स्थायी ख्याति के चिरप्रतिष्ठित विद्वानों ने भी विनम्रतापूर्वक उनका शिष्यत्व स्वीकार किया। हान-शु और कविताओं के अतिरिक्त उन्होंने 'नू चिआइ' (या 'स्त्रियों की शिक्षा') नाम की पुस्तक भी लिखी। हाउ-हानरशु (उत्तरवर्ती हानवंश का इतिहास) के लेखक ने इनकी जीवनी का उपसंहार इस स्तुति के साथ किया है : 'वह कर्त्तव्यपरायण, शोभामयी, न्यायी और विदुषी थी।'