पूर्वी घाट का विस्तार भारत मे ओडिशा से लेकर तमिलनाडु तक पर्वतीय क्षेत्र जोकि की वर्तमान में बड़ी-बड़ी नदियों द्वारा विच्छेदित होकर एक असतत शृंखला में बदल गया है। इसकी औसत ऊँचाई 600 मीटर तक है।बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ इसे विभाजित करती है।यह पश्चिमी घाट से बिल्कुल भिन्न है।यह अधिक कटा-छँटा तथा पहाडीयों के रूप में है। पूर्वी धाट का विस्तार उत्तर - पूर्व में महानदी की घाटी से लेकर दक्षिण में बंगाल की खाड़ी के समानांतर नीलगिरी की पहाड़ियों तक हैं इसकी चौड़ाई उत्तर में 200 किमी तथा दक्षिण में 100 किमी है। इसकी पहाड़ियों के मध्य से प्रायद्वीपीय भारत की चार प्रमुख नदियों से होकर गुजरती है, जिन्हें गोदावरी , महानदी , कृष्णा, कावेरी के नाम से जाना जाता है ।ये नदियाँ उपजाऊ मैदान तथा डेल्टा का निर्माण करती है। कोरोमंडल तट क्षेत्र सहित तटीय मैदान इसके इसके और बंगाल की खाड़ी के मध्य स्थित है। इसका सबसे ऊँचा पर्वत शिखर विशाखपत्तनम(1680 मी) हैं एवं महेंद्रगिरी(1501मी)दूसरी सर्वोच्च चोटी है। पूर्वी घाट प्राचीन मोड़दार वलित पर्वत का अवशिष्ट रूप है। शिवराय , जवादी , पल्कोंडा, वेलीकोड़ा नगारी और नाल्लामल्ला इसकी प्रमुख पहाड़िया है। मुख्य रूप से ऊष्णकटिबंधीय नम पर्णपाती वनस्पतियों वाला वन हैं। यहां के कई क्षेत्रों की आरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है ।तमिलनाडु का प्रसिद्ध हिल स्टेशन यारकाड(yarcaud)इन्ही पहाडीयों पर स्थित है।पूर्वी घाट प्रायद्वीपीय पठार के पूर्वी भाग में फैला है। इन्हें पूर्वाद्रि श्रेणी के नाम से भी जाना जाता है।

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