किसी विशिष्ट विष को बेअसर करने की क्षमता वाले प्रतिपिण्ड (एंटीबॉडी) को प्रतिजीवविष या एंटीटॉक्सिन कहते हैं। विष के संपर्क में आने से कुछ जन्तुओं, पौधों और जीवाणुओं द्वारा एंटीटॉक्सिन का उत्पादन किया जाता है। यद्यपि एन्टीटोक्सिन विषाक्त पदार्थों को बेअसर करने में सबसे प्रभावी हैं, इसके साथ ही वे बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीवों को भी मार सकते हैं। एंटीटॉक्सिन का निर्माण जीवों के भीतर होता है, और किसी संक्रामक रोग का इलाज करने के लिए इन्हें मनुष्यों सहित अन्य जीवों में इंजेक्ट किया जा सकता है। इसके लिए उस जानवर के शरीर में एक विशेष विष की सुरक्षित मात्रा प्रविष्ट करा दी जाती है। इसके बाद उस जन्तु का शरीर उस टॉक्सिन को बेअसर करने के लिए आवश्यक एंटीटॉक्सिन बनाता है। बाद में, उस जानवर से रक्त निकाला जाता है। जब एंटीटॉक्सिन को रक्त से प्राप्त किया जाता है, तो इसे शुद्ध करके मानव या अन्य जानवर में इंजेक्ट किया जाता है जिससे उसमें अस्थायी निष्क्रिय प्रतिरक्षा (पैसिव इम्युनिटी) उत्पन्न होती है।

डिप्थीरिया एंटीटॉक्सिन की एक पुरानी (1895 की) शीशी।

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