प्रबोध चंद्र बागची

भारतीय इतिहासकार

प्रबोध चंद्र बागची (बांग्ला: প্রবোধচন্দ্র-বাগচী) (१८ नवंबर १८९८ - १९ जनवरी १९५६) जिन्हें पी सी बागची भी कहा जाता था, २०वीं शताब्दी के सबसे उल्लेखनीय चीनी भाषा के पंडितों में से एक थे। वे विश्व भारती विश्वविद्यालय के तीसरे उपचार्य (कुलगुरू) थे।

प्रबोध चंद्र बागची
প্রবোধচন্দ্র-বাগচী

डॉ॰ बागची अपने कार्यालय विश्व भारती में
जन्म 18 नवम्बर 1898
येशोर, बंगाल प्रेसिडेंसी, ब्रितानी भारत
मौत 19 जनवरी 1956(1956-01-19) (उम्र 57)
शांतिनिकेतन, पश्चिम बंगाल, भारत
राष्ट्रीयता भारतीय
पेशा चीनी भाषा के पंडित, भारतविद्या

व्यक्तिगत जीवन और शिक्षा संपादित करें

उनका जन्म १८ नवंबर १९९८ को हरिनथ बागची और तारंगिनी देवी के घर येशोर में हुआ था। उन्होंने अपनी मां को बचपन में खो दिया था। उन्होंने बांग्लादेश में श्रीकोल (हैट श्रीकोल), खुलना जिला जिला में अपनी विद्यालयी शिक्षा पूर्ण की।[1]

डॉ॰ बागची एक अच्छे छात्र रहे और उनके शिक्षकों और हेड मास्टर के पसंदीदा भी थे जिन्होंने उनसे बड़ी उम्मीदें थी।[2] १९१४ में, वह मैट्रिक परीक्षा के लिए उपस्थित हुए। उन्होंने संस्कृत में सम्मान के साथ १९१८ में कृष्णगर सरकारी कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। वह अपने कॉलेज में पहले स्थान पर रहे और प्रतिष्ठित मोहिनी मोहन रॉय पुरस्कार भी प्राप्त किया। उन्होंने प्राचीन भारतीय इतिहास का अध्ययन करने की इच्छा के कारण संस्कृत भाषा चुनी। वह १९२० में प्रथम श्रेणी से मास्टर ऑफ़ एजुकेशन को प्राप्त करके प्राचीन इतिहास और संस्कृति में स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए कलकत्ता विश्वविद्यालय में शामिल हो गए। उन्हें बाद में धर्म अनुभाग में अच्छे कार्यों के लिए स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया और हमेशा विश्वविद्यालय में शीर्ष पर बने रहे।

सन्दर्भ संपादित करें

  1. Srikole (Hat Srikol), Khulna District
  2. Majumdar, R. C. (अप्रैल 1957). "Asia: India and Central Asia By Prabodh Chandra Bagchi (Calcutta, National Council of Education, 1955, pp. 184, Rs. 8|-)". India Quarterly: A Journal of International Affairs (अंग्रेज़ी में). 13 (2): 160–161. आइ॰एस॰एस॰एन॰ 0974-9284. डीओआइ:10.1177/097492845701300210. अभिगमन तिथि 27 नवम्बर 2018.