प्रमाणवार्त्तिक (तिब्बती: tshad ma rnam 'grel), धर्मकीर्ति द्वारा रचित प्रसिद्ध न्यायशास्त्रीय ग्रन्थ है। इसमें चार परिच्छेद हैं-

  • स्वार्थानुमान
  • प्रामाण्यवाद
  • प्रत्यक्ष
  • परार्थानुमान

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